31.12.16

कड़ाके की सर्दी में भी मस्ती का पारा गरम




सताये, रोम-रोम ठिठुराते कड़ाके की सर्दी खूब
सुहाये, रात में अलाव और सबुह की गुनगुनी धूप
सुहाने, ऊनी कपड़ों के भीतर से लेलो मजा जनाब
सुलगते, सिगड़ी में उफनते चाय और गरमा-गरम सूप

कोहरों के गिरफ्त में आ सूरज
दिशा चिनहात न कोन है पूरब
दोपहर ही जानौ अब सबेरा
दिन ढल जात सबही अकारज


नल की टोंटी से झरता ओला
पोखरों ने बदला अपना चोला
पानी की न पूछ अब स्वरूप
वों पल में मासा, पल में तोला


समयचक्र का सुई धीरे-धीरे जाड़े की ओर जा रहा है। कहीं घनघोर कोहरा तो कहीं शीतलहर का आलम, लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दे रहा है। आलमारी से स्वेटर, मफलर और रजाई निकल चुके है। फ्रिजर की जगह गिजर आ गया। मेकअप बाक्स में भी गोल्ड क्रीम ने कब्जा जमा लिया है। लोग अपने-अपने तरीके से सभी बाकी ऋतुओं की तरह शीत का सामने करने को तैयार है। सुबह-सुबह घर पर आने वाले अखबारों को ज्यादा तवज्जों देने की जरूरत नहीं वर्ना ऋतुओं का आनंद नहीं ले पायेंगे। और ऋतुएं भी अपना पूर्ण प्रकोप दिखाये बगैर ही लौट जायेगी। दिल खोल कर शानदार तरीके से शीतकाल का स्वागत करने से वो भी हमें सेहत और तंदूरस्ती से भरपूर चार महीना देके जायेंगे। ठंड और रूखी त्वचा की चिंता छोड़कर सैर सपाटे के मूड में आइये। क्रिसमस डे, स्कूल में शीतकालीन छुट्टी और नव वर्ष का आगाज है ही सोने पे सुहागा ऑफर। अभयारण्य, पार्क, जूं, बाग-बगीचे, ताल-तलैया आदि आपके स्वागत को आतुर बाहे फैलाये खड़े है, तो चलिये प्रकृति के करीब इस कड़ाके की सर्दी में भी मस्ती का पारा गरम करें।


पर्यटन पाइंट-




जो विभिन्न पर्यटक स्थलों का आनंद नहीं ले पाये वे बहानों के पहाड़ बनाने से बाज नहीं आते। कुछ प्राकृतिक आपदाओं और हादसों के डर से बाहर न जा पाया, काम के वयस्तता से समय ही नहीं निकला, बस या ट्रेन का टिकट कंफर्म नहीं हो पाया, माली हालत ठीक नहीं है, परिवारिक उलझनों में फसा रहा इत्यादि कारणों के दरार पर क्रेक क्रीम लगाए और कड़ाके की सर्दी में लजीज व्यंजनों का लुफ्त उठाये। मन में किसी बात का मलाल नहीं होना चाहिए कि हम इस मौसम में कुछ नहीं कर पाये। मौसम के ऊपर दोष भी न मड़े। जीवन में बरसात, सर्दी, बहार और गरमी बूरे योग से नहीं मिलते बहरहाल से भी कुदरत की देन है। तन और मन को मौसम के अनुकूल ढालने में ही जीवन का असली आनंद है। फिरहाल आपके सेहत के लिये शीत ऋतु में परोसे जाने वाले थाली आ आनंद लीजिए।

लजीज व्यंजन

गर सौर-सपाटे और लजीज व्यंजनों से भी जी न भरे तो सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे ठिठुरते गरीब दीन-हीन लोगों को जी भरके निहारें। अनके पास मौसम की मार सहने के लिये क्या-क्या संसाधन इसकी भी एक सूची बनाये। काम की तलास में घर-द्वार छोड़ कर दूर देश में पलायन कर आये किसी गांव के बेरोजगार युवा को रेल्वे स्टेशन के बेंच में आराम से सोते देखें। फूटपाथ के डस्टबीन में से प्लास्टि की थैली और कचरे से आग चलाकर हाथ सेंकते हमाल और रिक्शचालक। किसी दुकान के बरामदे में सोये कोई मंदबुद्धि इंसान, भिख मांगने वाले गरीब, घर से निकाले गये बुजूर्ग जनों के अंग के कपड़ों को देखें। यदि इतना सब कुछ देखने के बाद यदि कड़ाके की काली रात में भी आपके तन-मन में आग न लगे, आपका जिया न धड़के, आंखे खुली न रह जाये तब तो वाकई ये मौसम क्रूर है। अब और आगे कुछ देखने की जरूरत नहीं सिर्फ अपने आपको हर परिस्थिति से जूझना सिखाये। हर ऋतु आपके अनुकूल होकर आनंद भर देगी जीवन में। 
खुले आसमां तले गुजार दी जिंदगी, कुछ बिरादरी वाले।
हम महलों के भीतर से कोसते रहे, सुख से जीने वाले।।

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22.12.16

जियो सिम के लिये फड़फड़ाते 2G, 3G एंड्रॉयड

ये भारत देश है साहब, यहां असंभव कुछ भी नहीं होता। भारतीय जितना जुगाड़ लगाते है शायद ही कोई और देश सोच पाता होगा। चूंकि हम पौराणिक लोगों के बीच पायरेसी कुछ भी नहीं है, तो फिर कॉपीराइट का सवाल ही नहीं। जुगाड़ोद्योग का मुकंदीलाल जो भी इजात करता है वो सबके लिये उपलब्ध होता है। जियो का भी तोड़ आयेगा माकूल समय आने दीजिए। अन्य टेलकॉम कंपनी यदि कोई तोड़ नहीं निकालेगा तो जुगाड़ोद्योग से आयेगा। डाटा पेक और मोबाइल मार्केट मौसम के अनुकूल अगाड़ी-पिछाड़ी दौड़ रही है कि अचानक रिलायंस ने 4 जी जियो सिम लॉच कर दिया। टोटल फ्री स्कीम ने सबकी हवा निकाल दी।


आजकल किसी के सोच से आगे की सोच रखने वाले लोगों में एक ही बात की होड़ मची है कि कौन सबसे पहले रिलायंस कंपनी के 4 जी जियो सिम का तोड़ निकालेगा। लोग अक्सर ये सवाल पूछते है कि जियो को 2 जी और 3 जी वाले एंड्रायड मोबाइल में कैसे चलाये? कॉलिंग और एसएमएस पैक से ज्यादा इंटरनेट डाटा हरेक के लिये जरूरी हो गया है। ऐसे में एंड्रॉयड फोन का जियो सिम के लिये तड़प लाजमी है।  
जो लोग नेट चला रहे है वे अपने हैडसेट पर सर्च करते नहीं थकते कि जियो कब से अन्य सभी एंड्रॉयड के लिये उपलब्ध होगा। क्या रिलायंस कोई ऐसा एप लांच करेगा जिससे जियो की पहुंच प्रत्येक हेंडसेट तक हो सके। फ्री कॉलिंग और एसएमएस को छोड़ों नेट डेटा ही मिल जाये तो, जियो जिंदाबाद। अन्य टेलकॉम कंपनी राहत भी तो नहीं दे रहा है। कॉल दरें घटाते है तो नेट पैक में जान निकाल देते है। एसएमएस पैक तो त्योहारों में काम नहीं आते है ऐसे में क्या फायदा। तो क्यो न मोबाइल और सिम बदलकर डिजिटल हो जाये 4G के साथ। 
फ्री की वैधता समाप्त होने के बाद कल जो होगा देखा जायेगा, आज तो फोकट का मिल रहा है। जियो में फायदा देखकर भी जिनको नहीं लेना है वो लाख तर्क देते है, इंटरनेट के सर्च बढ़ाने के नुस्खे, ब्लॉग अथवा वेब के ट्राफिक बढ़ाने का फंडा। यूट्यूब वाले भी ऐसे ही बंडलमार विडियों अपलोड कर फोकट का टाइम कोटा कर रहे है, लाइक करो, कमेंट करो, सबस्क्राइब करो, फिडबैक दो वगैरह-वगैरह। फ्री की वैधता समाप्त होने के बाद सिम ही बदल देंगे और क्या। यहा मेरे और तुम्हारे चकल्लस से कुछ नहीं होने वाला जो भी करेगा रिलायंस कंपनी ही करेंगा। तब तक फड़फड़ाने दो 2G और 3G हैडसेट को।


नोकिया 1100 का
अलग था जमाना
जी भर बातें, 
न बैटरी थके न लाइन कटे।
आया एन 70
नेट के साथ,
गुरूर से लबरेज
कैमरा, विडियों, छैल छबीले।
फिर सेमसंग
एंड्रायड एप 
3 जी का मजा
बटन झंझट नहीं, ऊंगली में नाचे।
अब माइक्रोमेक्स 
ग्रेड पे अपग्रेड
झटपझ अपलोड
4 जी, डिजिटल-डिजिटल रटे।

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2.12.16

खूंखार मानवों से मासूम जानवरों का सामना कराता जंगल सफारी नया रायपुर

प्रकृति प्रेमी सैर-सपाटे के लिए ऐसी जगहों में जाना ज्यादा पंसद करते है जहां मन आनंद से भर जाए और तन में नई ताजगी आए बिना किसी अतिरिक्त खर्चे के। परिवार के साथ बाहर घुमना हर कोई चाहता है किन्तु घर को छोड़कर लम्बी दूरी की यात्रा सभी नहीं कर पाते है। ऐसे में अगर आसपास ही कोई सैर-सपाटे लायक अच्छा माहौल मिल जाये तो लोग बिन-बिचारे घुम आते है। शायद इसीलिए हाल ही में अस्तित्व में आया नया रायपुर का जंगल सफारी पर्यटकों से गुलजार होता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ के वन विभाग द्वारा लगभग 12 सौ एकड़ में तैयार जंगल में हिरण, शेर, बाघ, भालू, मगरमच्छ, नीलगाय, बारहसिंगा आदि जानवरों के साथ अनेक प्रजाति की तितली, पक्षियां आदि स्वछंद विचरते दिखेंगे। 
राजधानी के नया रायपुर क्षेत्र में विकसित हो रहे जंगल सफारी एवं बॉटनिकल गार्डन को प्रदेश सरकार रायपुर के सबसे बड़े मनोरंजन एवं शिक्षण केंद्र के रूप में तैयार कर रहा है। जिसमें 800 सौ एकड़ के जंगल सफारी को पूर्ण कर आम जनता के लिए सशुल्क 1 नवंबर 2016 से खोल दिया गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतिथ्य में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 2016 के शुभारंभ पर शानदार तरीके से लोकार्पण होने के उपरांत देश-विदेश के पर्यटक जंगल सफारी को देखने के लिए उत्सुक हैं। यह नंदन वन जंगल सफारी रायपुर रेलवे स्टेशन से 35 किमी, रायपुर बस स्टैंड से 30 किमी और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से 15 किलोमीटर की दूरी पर है।
किन्तु वर्तमान में जंगल सफारी जितना सुनने में काबिल-ए-तारीफ लगता है उतना ही देखने के बाद नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। विभाग के ब्रोसर और घोषणा में जिन-जिन बातों का उल्लेख किया गया है उस पर हकीकत कुछ और कहता है। शहर के बीचो-बीच बना जंगल ग्रामीणों की कृषि भूमि, निस्तारी तालाब, सिचाई के लिए बने जलाशय, चारागाह, गांव की पगडंडी आदि की भूमि में विकसित किया गया है। यहां इस बात का उल्लेख करना भी जरूरी है कि खंडवा, पचेड़ा, मुड़पार भेलवाडीह आदि गांवों के किसानों के कृषि लायक जमीन को पांच लाख रूपए प्रति एकड़ मुआवजा देखकर खाली कराया गया है। एक तरफ तो वन विभाग जंगल बचाने के लिए वर्षों से काबिज ग्रामीणों को वन भूमि से खदेड़ कर अन्यत्र व्यवस्थापित कर रहा है वही दूसरी ओर शहर में मनोरंजन का केंद्र स्थापित करने के लिए लोगों को गांव से खदेड़ने को आतुर है। ग्रामीणों के विरोध और निवेदन पर कुछ युवाओं को गाइड, वाहन चालक और सिक्युरिटी गॉड के रूप में रोजगार मुहैया जरूर कराया गया है किन्तु वह भी अस्थाई तौर पर। उस सरकार यह तर्क दे रही है कि गांव वालों के लिए रोजगार के नये-नये रास्ते खुलेंगे। कृषि भूमि से बेदखल किसानों के सामने रोजी-रोटी की समस्या मुॅह खोल रही है। ग्रामीणों की समस्या को दरकिनार कर सरकार का ये कहना कि जंगल सफारी को वाशिंगटन और न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क के तर्क पर तैयार किया जायेगा एक तमाचा जैसे लगता है। कानून और संविधान के लिये अपवाद हो गये है नई राजधानी क्षेत्र के मूल निवासी और एनआरडीए। आश्चर्य होता है उनके साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को देखकर। यह पहली परियोजना नहीं है जिसमें किसानों की कृषि भूमि की बलि दी गई बल्कि पूरी नई राजधानी का यही किस्सा है। परियोजना जितनी बड़ी होती है वह उतनी ही बड़ी जमीन मांगती है। नई राजधानी की तमाम बड़ी परियोजनाओं के शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक केंद्रीय स्तर के बड़े-बड़े नेता पहुंचे, सभी ने तेजी से बदलते रायपुर को देखा किन्तु बदलाव के भेट चड़कर आंसु बहाते किसान और सिसकती उपजाऊ माटी को किसी ने नहीं देखा। जिस जंगल सफारी को पूरी दुनिया ने मोदी जी के कैमरे से देखा है वें हकीकत से भी वाकिफ हो कि इसे गांव और शहर के बीच में बसाया गया है। और शहर में जंगल कैसे, किन परिस्थितियों में बस सकता इसकी कल्पना कीजिए। 
जंगल सफारी की परिकल्पनाकर्ताओं ने भले ही रायपुर में विश्वस्तरीय मनोरंजन को जनहित से जोड़कर अपने सीने में एक और तमगा जड़ा लिये है किन्तु वह अब भी आधा अधूरा है। हाइटेक टिकटघर से टिकट लेकर जंगल सफारी पहुंचते ही भव्य प्रवेशद्वार, मिनी उद्यान, बैट्री चलित टैक्सी। जंगल भ्रमण के लिए वातानुकूलित तथा गैर वातानुकूलित सुरक्षित यात्री बस। अप्रशिक्षित गाइड के पोस्ट पर काम करते प्रभावित गांव के किसान का बेटा टाइगर सफारी, बियर सफारी, हर्बीवोर, लायन सफारी से लेकर खंडवा जलाशय दिखाता है। गांव का गाइड भोलेपन में कई ऐसी भी बातें कह देता है जो उनकी नौकरी के लिए खतरा है, वह भी बेचारा क्या करे आखिर है तो अप्रशिक्षित। उस गाइड की मासूमियत देखिये जो कहता है-'ये देखिये सर जंगल सफारी का मासूम जंगली जानवर जो नंदनवन से लाया गया है। जगह-जगह इनके पानी पीने के लिये तालाब बनाये गये है जो पहले कभी हराभरा खेत-खलिहान हुआ करता था।' आगे कहता है 'इस बांध को देखिये सर ये नेस्टिंग आइलैण्ड, जो पहले था तो हमारे गांव का किन्तु अब हमें यहा नहाने-धोने तो दूर घुसने तक नहीं दिया जाता है।' जंगल सफारी देखते पर्यटकों का मन भरता हो ऐसा भी नहीं है। पिंजरे में कैद खूंखार जानवरों सा बंद बस में बैठेे यात्री असंतुष्ट मन से 45-55 मिनट भ्रमण करता है। यात्री से पूरे पैसे लेकर आधा-अधूरा दिखाने का ताना बेचारे स्थानीय ग्रामीण गाइड सुनते है। विभाग कार्य अवधी का हवाला देकर पल्ला झाड़ते है। जंगल सफारी के नाम पर सैलानियों के अलावा जू का जानवर भी ठगा महसूस करते है। सही मायने में कहा जाए तो घुम फिरकर नाम बड़े दर्शन छोटे वाली बात मुक जानवरों के चेहरों से भी झलकते है। कहने को जानवर आजाद है लेकिन उन्हे तो नंदनवन जितना भी सुकून नहीं है। असिमित, असमय प्रतिदिन पहुंच रहे पर्यटक अव्यवस्था के लिये खूंखार होकर मासूम जानवरों को कोसने लगते है। विभागीय अव्यवस्था और जल्दबाजी में कही ऐसा न हो की कुछ दिनों बाद वे किसी फ्लाप शो की तरह दर्शक को तरसे!

सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़ का कतरन


15.11.16

लाख रूपये वाले चिंता में डूबे है और करोड़ों-अरबों वालों की चिन-ता ता, चिता-चिता ...


देश में 500 और 1000 का नोट अब रद्दी हो गया, प्रधानमंत्री के औपचारिक घोषणा के बाद से। इसे कालाधन जमा करने वालों के खिलाफ एक ब्रह्मास्त्र के रूप में देखा जा रहा है। अचानक ही नोट बंदी के ऐलान ले सबको हैरत में डाल दिया। प्रधानमंत्री के द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल देश में बल्कि पूरी दुनियां में खलबली मचा दी है। दूसरे ही दिन से 500 और 1000 के नोट बेकार हो गये। आधी रात में लोग विस्तार से जानकारी लेने समाचार चैनलों में डटे रहे। सुबह के अखबारों में पुराने नोटों के बारे में टोह लेने लगे आखिर जमा नोटों का क्या होगा? मोदी जी ने 30 दिसंबर तक नोट बदलने का समय देकर कुछ राहत जरूर दिया है किन्तु नोटों को बदलने की शर्तों ने आम आदमी को परेशान कर रखा है। रोज कमानें और रोज खाने के सामान जुटाने वाले लोगों की जिंदगी रूक सी गई है। सब का ध्यान अब सिफ 500 और 1000 के नोट पर है। सुबह-सुबह बैंकों के सामाने जुटते भीड़ से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोटों के अहमियत कितनी है दैनिक जीवन में। सबका होश उड़ा देने वाले नोट बंदी के फैसले का सभी वर्गों ने स्वागत किया है और यह कहा जा रहा है इससे आज आम आदमी परेशान जरूर है किन्तु उन्हे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जो अपनी मेहनत का कमाई जमा किये है उन्हे खबराने करने की जरूरत नहीं है, कुछ ही दिनों बाद सब कुछ ठीक हो जायेगा। किन्तु तो जो लोग कालधन जमा करके रखे है उनकी नींदे उड़ी हुई गई, नोटों के बंडल उनके लिए गले कि हड्डी साबित हो रहा है।
4-5 दिनों के ताजा जानकारी के अनुसार नोट बंदी से बैंको में रिकार्ड तोड़ रकम जमा हुये है। ये नोट किसी काले धन का नहीं अपितु मेहनत की कमाई वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के बैंक खातों में जमा हुये है। कई लोग अपनी बेटियों की शादी के लिए जमा करके रखे थे तो कई लोग फसल बेंच कर रूपये जमा करके रखे थे। बैंकों में नोट बदलने के कतार में भी वही लोग खड़े है जिनके पास बमुश्किल लाख रूपये होंगे। अपने लाख रूपये के लिए आम आदमी इसलिए चिंतित है क्यो ये उनकी खुन पसीने की कमाई और किसी कारण से बैंक में जमा नहीं करा पाये थे। छोटे और मध्यम वर्गीय परिवार का जमा धन बैंक में आने से ही बैंकों का रिकार्ड टूट गया तो सोचिए जब धनकुबेरों के घर से रूपये निकलेंगे तो क्या हाल होगा? बहुत अच्छी पहल कि गई है प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा इसमें को कोई दो मत नहीं। भविष्य में इसमें किसी प्रकार का कोई संशोधन अथवा शिथिलता धनकुबेरों के दबाव में नहीं होनी चाहिए। रही बात आम आदमी की परेशानी की तो अभी तो महज पांच ही दिन ही बीते है, धीरे-धीरे स्थिति सामान्य भी होने लगी है। ऐसे में जो लोग हाय-तौबा मचा रहे है वो आम आदमी नहीं, शायद उनके भी कलाधन हो। आम आदमी को इस मुश्किल के दौर में थोड़ा हौसला रखने की जरूरत है। धैर्य रखे देखों नेता-अफसर, मंत्री-संत्री, चोर-लुटेरे और साधु-संतों के ब्लैकमनी। कुछ धार्मिक ठिकाने जैसे- मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा और गिरजा घरों से भी अकूत सम्पत्ति निकलने वाला है। हम तो थोड़े-थोड़े में ही बहुत चिंता कर रहे है, जरा तमाशा देखिए उनका जिनके पास करोड़ों-अरबों रूपये है वो कैसे चिन-ता ता, चिता-चिता कर रहे है।

jayant sahu @ 9826753304

 
दैनिक समाचार पत्र देशबंधु में प्रकाशित लेख का कतरन.
सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़ का करतन

देखिए मोदी जी का ऐतिहासि​क फैसला—

13.11.16

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2016

36वें भारत अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मेला, 14 से 27 नवंबर तक

नई दिल्ली।राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 14 नवंबर, 2016 को नई दिल्‍ली के प्रगति मैदान के हमसाधवानी थियेटर में भारत व्‍यापार संवर्द्धन संगठन (आईटीपीओ) के सालाना प्रमुख समारोह, 36वें भारत अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मेला (14-27 नवंबर, 2016) का उद्घाटन करेंगे। वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण उद्घाटन समारोह की अध्‍यक्षता करेंगी। इस वर्ष इस मेले में 7000 भागीदार हिस्‍सा ले रहे हैं। दक्षिण कोरिया‘साझीदार देश’ होगा, जबकि ‘फोकस देश’ बेलारूस है। ‘साझीदार राज्‍य’ मध्‍य प्रदेश एवं झारखंड है, जबकि हरियाणा ‘फोकस राज्‍य’ के रूप में भाग ले रहा है। 27 देशों की 150 से अधिक कंपनियां मेले में भाग ले रही हैं। इनमें ऑस्‍ट्रेलिया, अफगनिस्‍तान, बेलारूस, बहरीन, बांग्‍ला देश, चीन, भूटान,जर्मनी, हांगकांग, ईरान, कुवैत, किरगिस्‍तान, म्‍यांमार, नीदरलैंड, यमन,श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, तिब्‍बत, टर्की, थाईलैंड,संयुक्‍त अरब अमीरात एवं ब्रिटेन शामिल हैं। घरेलू भागीदारी में सभी राज्‍य तथा केंद्र शासित प्रदेश, केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, निर्यात संवर्द्धन परिषद, कमोडिटी बोर्ड, वित्‍तीय संस्‍थान, कॉरपोरेट एवं गैर सरकारी संगठन आदि शामिल हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय का कपार्ट पेवेलियन लगभग 800 ग्रामीण कारीगरों एवं शिल्‍पकारों के साथ भागीदारी कर रहा है, जबकि 100 कारीगर राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक विकास एवं वित्‍त तथा कॉरपोरेशन के माध्‍यम से भाग ले रहे हैं। विभिन्‍न क्षेत्रों में निवेश के लिए भारत की वैश्‍विक अपील को विस्‍तारित करते हुए यह मेला भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बहुकोणीय कार्यनीति भी प्रकट करता है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल एवं व्‍यापार तथा उद्योग को सामाजिक आर्थिक विकास के एक इंजन के रूप में रूपांतरित करने के सुधारों से प्रेरित हैं। यह मेला सरकार द्वारा आरंभ विभिन्‍न अभियानों, योजनाओं एवं पहलों पर अद्यतन सूचनाओं की एक झलक भी प्रस्‍तुत करता है, जिनमें स्‍वच्‍छ भारत अभियान, स्‍वच्‍छ गंगा अभियान, जन-धन योजना, स्‍किल इंडिया,आधार, 175 सोलर मिशन, किसान फसल बीमा, कायाकल्प और शहरी रूपांतरण के लिए अटल मिशन (अमृत), स्‍टार्ट अप एवं स्‍टैंड अप अभियान,स्‍मार्ट सिटी, मॉडल ग्राम आदि शामिल हैं।

टिकट

- मेले के व्‍यवसाय दिवसों (14 से 18 नवंबर, 2016, टिकट: 500 रूपये) के दौरान द्वार संख्‍या 1,2,7 एवं 10 पर बिजनेस विजिटर रजिस्‍ट्रेशन काउंटर स्‍थापित किए जाएंगे। विदेशी व्‍यापार प्रतिनिधिमंडलों एवं आगंतुकों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए द्वार संख्‍या 1, प्रगति मैदान (भैरों मार्ग) पर इंटरनेशनल बिजनेस लाउंज (आईबीएल) संचालनरत रहेगा।
- सीजनल टिकट (14 से 27 नवंबर, 2016) 1800 रूपये का होगा।
- हालांकि मेला सभी आगंतुकों के लिए खुला रहेगा (कार्य दिवसों में वयस्‍कों के लिए 60 रूपये एवं बच्‍चों के लिए 40 रूपये), 14 से 27 नवंबर, 2016 तक शनिवार/रविवार/ छुट्टी के दिन वयस्‍कों के लिए टिकट का मूल्‍य 120 एवं बच्‍चों के लिए 60 रूपये होगा।
- टिकट आईटीपीओ की वेबसाइट के जरिए भी बुक की जा सकती है।
- टिकट आईटीपीओ के काउंटरों (द्वार 1 एवं 2) तथा दिल्‍ली मेट्रो स्‍टेशनों पर उपलब्‍ध होंगे।

प्रवेश

- वरिष्‍ठ नागरिकों (60 वर्ष एवं अधिक) तथा दिव्‍यांगजनों के लिए वैध आयु/शारीरिक विकलांगता प्रमाण पत्र (जिस पर फोटो लगा हो) के साथ सभी द्वारों से 19 से 27 नवंबर, 2016 तक निशुल्‍क प्रवेश है।

पार्किंग

- आगंतुकों के लिए किसी भी द्वार के बाहर या प्रगति मैदान के भीतर रूकने या पार्किंग की अनुमति नहीं है।
- पेड पार्किंग की सुविधा दिल्‍ली चिड़ियाघर, भैरों मार्ग, पुराना किला रोड, प्रगति मैदान मेट्रो स्‍टेशन/इंडिया गेट, एवं प्रगति मैदान के निकट अन्‍य पेड पार्किंग स्‍थानों पर उपलब्‍ध रहेगी।



4.11.16

छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण समारोह—2016

छत्तीसगढ़.रायपुर। नया रायपुर में चल रहे पांच दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन कार्यक्रम में राज्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया। समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 18 नागरिकों और दो संस्थाओं को विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान के लिए राज्य अलंकरणों से सम्मानित किये।
सम्मान ग्रहण करने वाले नागरिकों और संस्थाओं का एक परिचय :-


शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान
आदिम  जाति विकास विभाग

श्री शैनकुमार मण्डावी को सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना जागृत करने, ग्रामीण विकास एवं आदिवासी समाज को संगठित करने में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ‘शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा।श्री शैनकुमार मण्डावी का जन्म 23 अगस्त 1954 को ग्राम-भानपुरी (पोस्ट-देमार, तहसील व जिला-धमतरी) में हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए भी कला साधना के क्षेत्र में उनका योगदान प्रशंसनीय है। श्री मण्डावी ने बिना किसी प्रकार के गुरू अथवा प्रशिक्षक के कला के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योग्यता हासिल की। पिता स्व. श्री अमरसिंह मण्डावी से प्राप्त कला के ज्ञान के बाद 12 वर्ष के उम्र से ही आपने डफड़ा वादन, ढोलक वादन, तबला वादन आदि में महारत हासिल किया। अभिनय एवं नाचा के क्षेत्र में मया के फूल, जय शीतला माता नाचा पार्टी, नूतन आदर्श लीला मण्डली, रामधुनी पार्टी, गम्मत आदि में विशिष्टता प्राप्त की एवं विभिन्न आयोजनों में आपको पुरस्कृत एवं प्रशंसित किया गया। इसके अतिरिक्त धार्मिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय कार्यक्रमों तथा ग्रामीण विकास एवं खेलकूद के क्षेत्र में भी इनका योगदान प्रशंसनीय रहा, इससे प्रभावित होकर ग्रामीणों ने उन्हें आदिवासी समाज का मुखिया बनाया। अनेक वर्षों तक इस क्षेत्र में काम करते हुए आपने आदिवासी समाज को एकता के सूत्र में पिरोया है। आपको ढोलक वादन, तबला वादन एवं डफड़ा वादन में वाद्य कलाकार के रूप में महारथ हासिल है, जिसके कारण आपको अनेक अवसर पर सम्मनित भी किया गया है। आदिवासी समाज के प्रति आपका योगदान प्रशंसनीय है।

गुण्डाधूर सम्मान
खेल एवं युवा कल्याण विभाग

कुमारी रामफूल टोंडर को तलवारबाजी के पैरा ओलम्पिक अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियागिताओं में पदक प्राप्त कर खेल जगत में प्रदेश को गौरवान्वित करने और खेल में दृढ़ इच्छाशक्ति तथा लक्ष्य प्राप्ति की ओर निरंतर अग्रसर रहने के लिये ‘गुण्डाधूर सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा। कुमारी रामफूल टोंडर ग्राम खैरा सेतगंगा, जिला मुंगेली, छŸाीसगढ़ की हैं। आप तलवारबाजी (पैरा ओलम्पिक) खेल में अभूतपूर्व प्रतिभा सम्पन्न है। वर्ल्डकप व्हीलचेयर चैम्पियनशिप 01 से 03 मई 2015 कनाड़ा में भागीदारी किया एवं 8वां नेशनल व्हीलचेयर फेंसिंग प्रतियोगिता दिनांक 28 से 30 जनवरी 2016, करनाल हरियाणा में तलवारबाजी (पैरा ओलम्पिक) खेल में 3 स्वर्ण पदक प्राप्त कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।    

मिनीमाता सम्मान
महिला एवं बाल विकास विभाग

 श्रीमती चंदेश्वरी ठाकुर को महिला उत्थान एवं जनजागृति, सशक्तीकरण को संगठित और सामुदायिक उद्यम बना कर निरंतर सक्रिय रहने के उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘‘मिनी माता सम्मान’’ से नवाजा जाएगा।श्रीमती चंदेश्वरी ठाकुर का जन्म 15 जनवरी 1977 को ग्राम अमोरा पोस्ट लिमोरा (निपानी) करहीभदर थाना, तहसील व जिला- बालोद छत्तीसगढ़ में हुआ। आपने सिया देवी महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं में जन जागरूकता लाने हेतु अगरबत्ती, मोमबत्ती, पापड़, साबुन, मशरूम, सिलाई कड़ाई, दोना-पत्तल आदि का प्रशिक्षण देकर महिलाओं को रोजगार मुहैया करने का प्रयास किया। आपके द्वारा दलित-पीड़ित-शोषित लोगों को गांव-गांव में इकट्ठा कर, साक्षरता तथा छुआछूत की भावना हो दूर करने का अनूठा पहल किया गया। आपने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के महिलाओं को सही दिशा में जोड़ने हेतु गांव-गांव में अब तक 150 महिला स्व सहायता समूह, 70 महिला मंडल, गंगाजल, मितानीन, महाप्रसाद, लोककला मंच, रामायण मंडली, जसगीत मंडली एवं आदिवासी गीत-संगीत मंडली तैयार की, शिक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया। आपने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पंचायती राज, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, साक्षरता, पर्यावरण, जल प्रदूषण, नक्सलवाद, अलगाववाद, नारी जागरण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, पल्स पोलियो, आयोडीन युक्त नमक, मलेरिया रोधी कैंसर, एड्स, परिवार नियोजन आदि जन कल्याणकारी विषयों पर लगभग 5500 से ज्यादा महिलाओं की गांव-गांव में सभा लेकर, जागरूकता लाने का प्रयास करने का अनूठा पहल किया। महिला समिति एवं स्वयं के द्वारा निपानी करहीभदर, डौण्डी लोहारा, दल्लीराजहरा क्षेत्र, कांकेर, चारामा, दुर्गकोंदल, कोयलीबेड़ा लगभग तीन-चार जिलों के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के महिलाओं में बाल विवाह, शिक्षा आदि विषयों पर जन जागरूकता लाने का अथक प्रयास भी किया।

गुरु घासीदास सम्मान
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग

श्रीमती समेबाई शास्त्री को पंथी, पण्डवानी, सतनाम भजन एवं गायकी के माध्यम से गुरु घासीदास के जीवन मूल्यों को प्रकाशित कर सामाजिक चेतना एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उन्नयन हेतु ‘गुरू घासीदास सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा। श्रीमती समेबाई शाष्त्री का जन्म 03 अप्रैल 1965 को ग्राम-जोगीपुर, तहसील एवं जिला-बेमेतरा, छत्तीसगढ़ में हुआ था। वर्तमान में वे ग्राम कोहका (तिल्दा-नेवरा) जिला-बेमेतरा, छत्तीसगढ़ में निवासरत हैं। प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त श्रीमती समेबाई शास्त्री पंथी एवं पण्डवानी लोक कला की ख्यातिप्राप्त कलाकार हैं जिनके कार्यक्रम आकाशवाणी एवं दूरदर्षन से प्रसारित होते रहे हैं। आकाशवाणी द्वारा उन्हें ‘बी’ ग्रेड़ कलाकार श्रेणी में रखा गया है। पण्डवानी और सतनाम भजन गायकी के क्षेत्र में अन्तर्राज्यीय स्तर पर उनके अनेक कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। आपने अपनी संस्था सतनाम पण्डवानी पार्टी के माध्यम से सामाजिक चेतना को जागृत करने का प्रयास किया है।

ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान
सहकारिता विभाग

छत्तीसगढ़ शासन, गौरेला सहकारी विपणन संस्था मर्यादित पेन्ड्रारोड़, जिला बिलासपुर को सहकारिता के मूल उद्देश्य, उनके सिध्दांतों का पालन करते हुए सहकारी भावना को सबल प्रदान करने के लिए ‘‘ठाकुर प्यारे लाल सिंह पुरस्कार’’ से विभूषित किया जाएगा इस सहकारी संस्था को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, नई दिल्ली के द्वारा द्विवार्षिक सहकारी उत्कृष्टता पुरस्कार, 2014 (राज्य स्तर) से पुरस्कृत किया गया है। संस्था के कार्यक्षेत्र में बिलासपुर जिले के विकासखण्ड गौरेला, पेन्ड्रा, मरवाही के 186 ग्राम पंचायतें हैं। इस सहकारी संस्था में व्यक्तिगत सदस्यों की संख्या 1688 तथा 11 सहकारी संस्थाएं संस्था की सदस्य हैं। यह विपणन संस्था इफको की सदस्यता ग्रहण कर इफको से सीधे खाद विपणन कर कृषकों को समय पर उपलब्ध करा रही है। इस सहकारी संस्था के पास 2600 मेट्रिक टन क्षमता के 6 गोदाम स्वयं के उपलब्ध हैं। वर्तमान में संस्था की कार्यशील पूंजी 99.79 लाख रूपए है एवं भारतीय स्टेट बैंक शाखा पेन्ड्रारोड़ में 15 लाख रूपए फिक्स डिपाजिट है। यह संस्था किसी भी वित्तदायी संस्था अथवा राज्य शासन की व्यतिक्रमी नहीं है। संस्था का अभिलेख तातारीख पूर्ण है और संस्था लगातार लाभ अर्जित कर रही है। संस्था का प्रबंधन उत्कृष्ट होने के कारण किसी भी प्रकार के शिकायत, धोखाधड़ी या गबन के प्रकरण नहीं हैं। सहकारिता के क्षेत्र में इस सहकारी संस्था द्वारा उत्कृष्ट, प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य किया गया है।

हाजी हसन अली सम्मान
क्षेत्र: उर्दू भाषा की सेवा
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

श्री हसन जफ़र, ‘जफ़र रायपुरी‘ को गज़ल, नात, सलाम, नौहे वगैरह उर्दू की तमाम विधाओं में कलाम लिखने, नई पीढ़ी के शायरों की रहनुमाई करने, शायरी के माध्यम से उर्दू साहित्य की सतत सेवा करने ‘‘हाज़ी हसन अली सम्मान’’ से विभूषित किया जाएगा। हसन जफर ’’जफर रायपुरी’’ का जन्म 1942 में रायपुर शहर के मोमिनपारा में निवासरत् एक गरीब बुनकर परिवार में हुआ। घर में हाथ करघा पर कपड़ा बुनने का काम किया जाता था। आर्थिक तंगहाली की वजह से प्राथमिक तक शिक्षा ही प्राप्त कर सके। साहित्यिक संस्था छत्तीसगढ़ गुलशने अदब, रायपुर, तथा बज्में शेरो सुखन रायपुर सहित विभिन्न संस्थाओं ने उन्हे अदबी खिदमात के लिये सम्मानित किया है। ’’जफर रायपुरी’’ की विशेष पहचान हज़ल के लिये है। छत्तीसगढ़ राज्य में वे एकमात्र हजल गो शायर हैं (उर्दू शायरी में हास्य -व्यंग्य की शायरी को हज़ल कहा जाता है) ’’जफर रायपुरी’’ ने शायरी की तमाम विधाओं में कलाम लिखें हैं। गजल, हजल के साथ-साथ नात, मनकबत, सलाम, नौहे वगैरह उल्लेखनीय हैं। उन्होने प्रारंभिक दौर में शायरी की इस्लाह स्व. वहीदुल हसन ताबिश रायपुरी साहब से ली। 50 वर्षो से अधिक समय से उनकी साहित्यिक यात्रा जारी है। वे स्थानीय मुशायरों, कवि सम्मेलनों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं आंचलिक स्तर के मुशायरों में भी षिरकत करते हैं।’’जफर रायपुरी’’ की शायरी केवल हास्य-व्यंग्य पर आधारित नही है बल्कि वे शिक्षा प्रद भी हैं उनमें नई पीढ़ि के लिये संदेश भी है। वे सिर्फ हंसाते नही है बल्कि अपने कलम अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को राह दिखाते है। उन्हे उनकी साहित्यिक सेवा के लिये विभिन्न संस्थाओं से सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। ’’जफर रायपुरी’’ नई पीढ़ि के शायरों की रहनुमाई भी बखूबी कर रहे है। अक्सर नवोदित शायर उनसे कलाम पर इस्लाह लेते देखे जा सकते है। वे नवोदित शायरों को शायरी की बारीकिया, शायरी का शिल्प, बहर आदि की जानकारी देते है। इस तरह ’’जफर रायपुरी’’ अपनी शायरी के माध्यम से उर्दू साहित्य की सतत् सेवा कर रहे है।

महाराज प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान
क्षेत्र: तीरंदाजी
खेल एवं युवा कल्याण विभाग

श्री अभिलाष राज को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त कर राष्ट्रीय खेल जगत में प्रदेश को गौरवान्वित करने के लिए ‘‘महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान’’ से सम्मानित किया जाएगा। श्री अभिलाष राज में तीरंदाजी की अभूतपूर्व प्रतिभा है। बिलासपुर जिले के एक छोटे से गांव परसतराई में परंपरागत रूप से धनुष-बाण के साथ खेलते-खेलते उन्होंने तीरंदाजी को एकलव्य के समान लगन निष्ठा से कड़ी मेहनत कर प्रतिस्पर्धात्मक तीरंदाजी सीखा। श्री अभिलाष राज 23वीं सीनियर नेशनल आरचरी चैम्पियनशिप झारखण्ड 8 से 11 अप्रैल 2016 में स्वर्ण पदक अर्जित कर छत्तीसगढ़ राज्य को गौरवान्वित किया है।

पं. रविशंकर शुक्ल सम्मान
क्षेत्र: सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक क्षेत्र में अभिनव प्रयत्न
सामान्य प्रशासन विभाग

श्री विनोद कुमार शुक्ल को साहित्यिक विधाओं यथा कविता, कहानी और उपन्यास में मौलिक लेखन, साथ ही फिल्म एवं नाटक के क्षेत्र में रचनात्मक योगदान के लिए ‘‘पं. रविशंकर शुक्ल सम्मान’’ से सादर विभूषित करता है। श्री विनोद कुमार शुक्ल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करते हुए वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए। श्री शुक्ल की कृतियों में 9 कविता संग्रह, 5 उपन्यास संग्रह, 2 कहानी संग्रह हैं। मध्यप्रदेश शासन ने श्री शुक्ल को वर्ष 1975-76 में गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, वर्ष 1981 में रजा पुरस्कार प्रदान किये। ओड़िशा सरकार द्वारा वर्ष 1992 में सृजन भारतीय सम्मान, वर्ष 1997 में मोदी फाउण्डेशन द्वारा दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, वर्ष 1999 में भारत सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार, वर्ष 2001 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान, वर्ष 2014 में उत्तरप्रदेश शासन द्वारा हिन्दी गौरव सम्मान एवं अन्य पुरस्कार प्रदान किये गये हैं। श्री शुक्ल वर्ष 1994 से 1996 तक निराला सृजनपीठ, भारत भवन, भोपाल के अध्यक्ष रहे। साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सदस्य भी रहे। श्री शुक्ल वर्ष 2005 से 2008 तक महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कार्यपरिषद के सदस्य रहे। आप वर्तमान में तक्षशिला शैक्षणिक संस्थान, नई दिल्ली की तक्षशिला बाल साहित्य सृजनपीठ के अंतर्गत बच्चों के लिये साहित्य लेखन का कार्य कर रहे हैं।

राजा चक्रधर सिंह सम्मान
क्षेत्र: संगीत एवं कला
संस्कृति विभाग

श्री राजकमल नायक को नाट्य लेखक, निर्देशक और अभिनेता के रूप में राष्ट््रीय स्तर पर पहचान बनाते हुए रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और सतत साधना के लिये ‘‘राजा चक्रधर सिंह सम्मान’’ से नवाजा जाएगा। श्री राजकमल नायक ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय शीर्षस्थ नाट्य निर्देशकों के साथ अभिनय और नेपथ्यकर्म किया है। आपने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार, ओड़िशा आदि प्रदेशों में 58 नाट्य शिविरों का संचालन, निर्देशन राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के सौजन्य से किया है तथा 70 नाटक विगत 45 वर्षों में निर्देशित किये हैं। आपके 8 लघु नाटक प्रकाशित हुये है। आप नाट्य पत्रिका ‘रंग-संवाद’ व सिलसिला तथा राज्य संसाधन केन्द्र, छत्तीसगढ़ की पत्रिका ‘नई इबारत’ तथा नवसाक्षरों के लिए प्रकाशित साहित्य के संपादक हैं। आपने श्याम बेनेगल निर्देशित फिल्म ‘समर’ तथा ब.व. कारंत निर्देशित टेलीफिल्म ‘औरत भली रामकली’ में प्रमुख भूमिकाएं अभिनीत कीं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रमों में शिरकत किया है। आपको संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005-2007 के लिए सीनियर फेलोशिप दिया गया। आपने शिक्षा, साक्षरता, जल संग्रहण, जल प्रदूषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पॉलीथीन आदि विषयों पर नाट्य लेखन और क्षेत्रीय, राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक नाट्य शिविरों का निर्देशन व नाट्य प्रदर्शन किया है।

दाऊ मंदराजी सम्मान
क्षेत्र: लोककला/शिल्प
संस्कृति विभाग

छत्तीसगढ़ शासन, श्री शिवकुमार तिवारी को लोककला के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना से लोकप्रियता का मुकाम हासिल करते हुए, निरंतर योगदान के लिये ‘‘दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान’’ प्रदान किया जाएगा। श्री शिवकुमार तिवारी हिर्री माइंस, बिलासपुर के निवासी हैं। आप ऑल इण्डिया रेडियो और दूरदर्शन के नियमित कलाकार हैं। 1997 में आकाशवाणी द्वारा आपको ‘बी’ उच्च ग्रेड लोक गायक की मान्यता प्रदान की गई है। आपके द्वारा राज्य स्तरीय विभिन्न समारोहों जैसे मल्हार महोत्सव-2014, बिलासा महोत्सव-2007, श्री राजीवलोचन महोत्सव 2003 आदि में लोककला की सांगीतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। आपको कामधेनु सम्मान-2013, दाऊ रामचंद देशमुख सम्मान-2010, सांस्कृतिक लोककला मंच भाटापारा द्वारा छत्तीसगढ़ गौरव रत्न एवं विभिन्न स्थानीय सम्मान एवं अभिनंदन प्राप्त हुए हैं।  

डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान
क्षेत्र: कृषि
कृषि विभाग

श्री लक्ष्मण कुमार पटेल को समन्वित पोषण एवं कीट प्रबंधन, जैविक कृषि, कृषि उत्पादों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण द्वारा मूल्य संवर्धन के उल्लेखनीय कार्यों हेतु ‘‘डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान’’ प्रदान किया जाएगा। श्री पटेल का जन्म ग्राम-कंचनपुर, जिला-रायगढ़ के सामान्य कृषक परिवार में 29 मई, 1968 को हुआ। हायर सेकेण्डरी की शिक्षा पूर्ण कर वर्ष 1989-90 से पुश्तैनी कृषि कार्य में संलग्न हुये। कृषि विभाग की योजनान्तर्गत नलकूप खनन कराकर सिंचित रकबे में वृद्धि द्वारा अधिक उपज प्राप्त की तथा शनैः शनैः स्वयं के संसाधनों से पूरे कृषि रकबे को सिंचित रकबे में परिवर्तित कर लिया। धान व गेहूं की उन्नत कृषि से भी आगे बढ़ते हुए वर्ष 2009-10 में गन्ना, केला व अदरक की खेती भी प्रारंभ की तथा प्राप्त लाभ से प्रोत्साहित होकर सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों के उपयोग से सब्जियों की खेती भी प्रारंभ कर आय में वृद्धि की। प्रसार कार्यकर्ताओं से निरंतर संपर्क में रहकर उन्नत कृषि तकनीक अर्जित करते हुए आज प्लास्टिकल्चर, मछलीपालन, दुग्ध उत्पादन, मशरूम उत्पादन व खाद्य प्रसंस्करण को अंगीकृत कर आय के नये प्रतिमान स्थापित किये तथा अन्य कृषकों के मार्गदर्शक के रूप रूप में कृषि विकास के कार्यों में निरंतर संलग्न है।

पण्डित माधवराव सप्रे स्मृति राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान
जनसंपर्क विभाग

श्री विजयदत्त श्रीधर को पत्रकारिता के इतिहास प्रलेखन के  लिए प्रमाणिक प्रयत्नों, सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता करने तथा रचनात्मक लेखन के लिए, ‘पण्डित माधवराव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान से नवाजा जाएगा। श्री विजयदत्त श्रीधर का जन्म 10 अक्टूबर, 1948 को ग्राम बोहानी, जिला नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्होंने उन्होंने भोपाल में वर्ष 1984 में माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की स्थापना की। उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए श्री विजय दत्त श्रीधर को 2012 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्म श्री’ अलंकरण से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उन्हें भरतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार वर्ष 2011 से भी सम्मानित किया। उन्हें शिक्षा एवं शोध में असाधारण अवदान के लिये मध्यप्रदेश शासन द्वारा महर्षि वेद व्यास राष्ट्रीय सम्मान (2012-13) से सम्मानित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश में पत्रकारिता का इतिहास, मध्यप्रदेश में पत्रकारिता का उद्विकास, शब्दसत्ता, चौथा पड़ाव तथा शह और मात आपकी चर्चित पुस्तकें हैं। इसके अतिरिक्त आपने अनेक कृतियों का संपादन किया। आप वर्ष 1981 से जनसंचार माध्यमों और विज्ञान संचार पर केन्द्रित शोधपत्रिका मासिक ‘आंचलिक पत्रकार’ का संपादन कर रहे हैं।

चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार
क्षेत्र: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (हिन्दी)
जनसम्पर्क विभाग

जगदलपुर (बस्तर) के वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार श्री नरेश मिश्रा को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (हिन्दी) के क्षेत्र में साहसिक, चुनौतीपूर्ण रिपोर्टिंग के लिए ‘‘श्री चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार‘‘ से विभूषित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में टेलीविजन पत्रकार के रूप् में कार्यरत श्री नरेश मिश्रा बस्तर में हो रहे विकास कार्यों के साथ-साथ कई चुनौतीपूर्ण घटनाओं और समस्याओं पर साहसिक रिपोर्टिंग की है। वे जगदलपुर में टेलीविजन समाचार चैनल आई.बी.सी 24 के ब्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।

मधुकर खेर स्मृति पुरस्कार
क्षेत्र: प्रिन्ट मीडिया (अंग्रेजी)
जनसम्पर्क विभाग

श्री समीर शुक्ला को प्रिन्ट मीडिया अंग्रेज़ी के क्षेत्र में सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर गहरी पकड़ के साथ रचनात्मक पत्रकारिता और लेखन के लिए ‘‘मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार’’ से सम्मानित किया जाएगा।श्री समीर शुक्ला का जन्म 8 नवंबर 1968 को रायपुर में हुआ था। आप 1996 से सेन्ट्रल क्रानिकल से जुड़े और कला, संस्कृति, राजनीति और व्यापार आदि क्षेत्रों में रिपोर्टिंग की। आप बस्तर के नक्सल हिंसा पर आधारित पुस्तक ‘एन एल्यूसिव गेम’ के लेखक हैं। आप मई 2013-14 और 2014-15 में विधानसभा प्रेस सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं और समिति के भूटान, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के प्रवास के दौरान राजनेताओं से हुए भेंट की रिपोर्टिंग भी की है।

दानवीर भामाशाह सम्मान
क्षेत्र: दानशीलता सौहार्द्र एवं अनुकरणीय सहायता
समाज कल्याण विभाग

श्रीमती दिनेश कुमारी चतुर्वेदी को निःशुल्क चिकित्सा शिविर, महिला जागृति शिविर, महिला सशक्तीकरण के अन्तर्गत महिलाओं को साक्षर करने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अनुकरणीय कार्य करने हेतु ‘‘दानवीर भामाशाह सम्मान’’ से नवाजा जाएगा। छत्तीसगढ़ के ग्राम-सुरपा, तहसील-पाटन, जिला-दुर्ग निवासी श्रीमती दिनेश कुमारी चतुर्वेदी ने 8 एकड़ जमीन जिसकी लागत लगभग रूपये 1.00 करोड़ होगी, शिक्षा विभाग को हायर सेकण्डरी स्कूल तैयार कर प्रदान किया। आपके द्वारा सामाजिक सौहार्द तथा समाज सेवा के स्थायी कार्यों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने तथा सामाजिक चेतना का अच्छा वातावरण विकसित करने हेतु विभिन्न धर्मार्थ एवं सामाजिक संस्थाओं को रूपये 15 लाख 50 हजार से अधिक की सहायता राशि दी गई है। दानशीलता एवं समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए अनुकरणीय कार्य के लिए पहले भी आपको मिनी माता अमृत सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, स्त्री शक्ति पुरस्कार, कस्तूरबा फेलोशिप सम्मान, सामाजिक समरसता सम्मान, छत्तीसगढ़ नारी गौरव सम्मान आदि से विभूषित किया गया हैै।

धन्वन्तरी सम्मान
क्षेत्र: आयुर्वेद चिकित्सा
स्वास्थ्य विभाग

डॉ0 मनोहर लाल टेकचंदानी  को आयुर्वेदिक चिकित्सा के वैज्ञानिक युग में पुनर्प्रतिष्ठा करने, स्वतंत्र स्वास्थ्य परामर्श कक्ष के साथ ‘‘वैद्यशाला‘‘ नामक संस्था की स्थापना, आयुर्वेद चिकित्सा के अथक प्रचार प्रसार करने के लिए ‘‘धन्वन्तरी सम्मान‘‘ से विभूषित किया जाएगा।  डॉ0 मनोहर लाल टेकचंदानी का जन्म 22 मार्च 1948 को दुर्ग, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ में हुआ। आपने बी.ए.एम.एम. की उपाधि वर्ष 1969 में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर, पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ से प्राप्त की। आप शासकीय सेवा में सन् 1971 में वैद्य प्रथम श्रेणी के पद पर जिला बैतूल में कार्यभार ग्रहण किये। 1973 से 1980 तक आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के पद पर विभिन्न शासकीय आयुर्वेद औषधालयों में तथा सन् 1980 से 1999 तक जिला आयुर्वेद चिकित्सालय बिलासपुर में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे। सन् 1999 में सम्भागीय अधिकारी आयुर्वेद संभाग बिलासपुर तथा सन् 2002 से 2010 तक जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में आयुष विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के नोडल अधिकारी के रूप में सफलता पूवर्क कार्य किए । सेवानिवृत्त होने के पश्चात स्वतंत्र स्वास्थ्य परामर्श कक्ष के साथ ‘‘वैद्यशाला‘‘ नामक संस्था की स्थापना के मुख्य चिकित्सक के रूप में अन्य पांच वैद्यों के साथ आयुर्वेद चिकित्सा एवं पंचकर्म के कार्य का निरंतर सम्पादन कर रहे हैं। साथ ही साप्ताहिक एवं समय-समय पर प्रमुख रूप से सप्ताह में एक बार प्रत्येक गुरूवार को निःशुल्क आयुर्वेद परामर्श एवं चिकित्सा कार्यो हेतु शिविर लगाये जा रहे हैं । आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए आपको श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा.लि. नागपुर, गुजरात प्रांत की ऊंझा फार्मेसी, आध्यात्मिक संस्था मैनपुरी जिला-आगरा (उ.प्र.), म.प्र. और छ.ग. आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी संघ द्वारा कई बार सम्मानित किया गया।

बिलासाबाई केंवटीन सम्मान
क्षेत्र: मछली पालन
मत्स्य विभाग

श्री सानेन्द्र कुमार बघेल को मत्स्य बीज उत्पादन एवं संवर्धन करने, मत्स्य उत्पादन, मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र का विकास करने और मछली की प्रजातियों का संरक्षण करने के लिये ‘‘श्रीमती बिलासाबाई केंवटीन सम्मान’’ प्रदान किया जाएगा। श्री सानेन्द्र कुमार बघेल, पिता-श्री नरेश कुमार बघेल, ग्राम - कुरूदडीह, वि.खं. पाटन, जिला - दुर्ग निवासी हैं। आपने वर्ष 2015-16 में 3500 लाख स्पान, 124 लाख मेजर कार्प मत्स्य बीज का उत्पादन एवं संवर्धन किया है। आपने बीज उत्पादन पर 25.46 लाख रूपये व्यय किये और उत्पादित मत्स्य बीज को स्वयं के निजी तालाबों में संचित कर उनके विक्रय से आय रू. 34.52 लाख एवं शुद्ध आय रू. 9.06 लाख अर्जित किया। आपके द्वारा 1.50 हेक्टेयर जलक्षेत्र में 8.50 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन कर मत्स्य विक्रय से शुद्ध आय रूपये 2.45 लाख अर्जित किया गया। आपने मुर्गी पालन 20000 हजार वर्ग फीट में, 16000 चूजों का वर्ष में पाँच बार पालन किया और औसत आय रू. 4.00 लाख, बकरी पालन में व्यय रू. 3.41 लाख एवं विक्रय से आय रू. 5.32 लाख, शुद्ध आय रू. 1.91 लाख, देशी मांगुर पालन में कुल व्यय रू 1.30 लाख, विक्रय से आय रू 2.61 लाख, शुद्व आय रू 1.31 लाख अर्जित कर कीर्तिमान स्थापित किया है।

संस्कृत भाषा सम्मान
उच्च शिक्षा विभाग

डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा को देवभाषा संस्कृत की श्रीवृद्धि करने, अध्यापन, लेखन व संपादन कर्म से जनमानस में इसकी पुनर्प्रतिष्ठा की राह सुनिश्चित करने और प्राचीन भाषा के प्रति उनकी अप्रतिम ललक को प्रणति मानते, ‘संस्कृत भाषा सम्मान’ से नवाजा जाएगा।  डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा का जन्म 12 जून 1940 को रायपुर (छत्तीगढ़) में हुआ था। आपने एम.ए.-संस्कृत वर्ष-1963 में एवं एमए-हिन्दी वर्ष-1967 में की शैक्षिक योग्यता प्राप्त की और वैदिक एवं वैदिकेतर साहित्य के परिप्रेक्ष्य में इन्द्र विषय में वर्ष-1972 में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आपने सन् 1969 से 1973 तक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में एम.ए. क्लासिक्स तथा सन् 1974 से 1983 तक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में एक नये विषय के रूप में ज्योतिष का अध्यापन कार्य किया गया तथा सन् 1963 से 2000 तक दुर्गा महाविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में सेवायें प्रदान कीं। छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध श्रीदेव पंचांग के संपादन में सहयोग किया और वर्तमान में मुख्य संपादक के रूप में दायित्व का निर्वहन सफलतापूर्वक कर रहे हैं। आप विगत 55 वर्षों से ज्योतिषीय परामर्श एवं मार्गदर्शन में संलग्न रहे है। आपके द्वारा लिखे गये शोध लेख 1. ऋग्वेदीय असुर का स्वरूप, 2. प्राग्वैदिक साहित्य में इन्द्र, 3. इन्द्र के अभिधान, 4. जैन साहित्य में इन्द्र का स्वरूप, 5. अथर्ववेद-संहितायां इन्द्रस्य स्वरूप विमर्श, 6. बौद्ध धर्म में इन्द्र आदि उल्लेखनीय हैं। आपके द्वारा आकाशवाणी तथा दूरदर्शन में बहुविध वार्ताओं का प्रसारण, रेहियो रूपक कर्ण-भारम् का (कवि भास द्वारा लिखित नाटक का संस्कृत भाषा में) निर्देशन किया गया।

डॉ. भंवर सिंह पोर्ते सम्मान
क्षेत्र: आदिवासियों की सेवा और उत्थान
आदिम जाति कल्याण विभाग

छत्तीसगढ़ शासन, पुरखा के सुरता जन कल्याण समिति नेवई ग्राम चारभाठा, तहसील पाटन, जिला दुर्ग को लोककला संस्कृति का संरक्षण संवर्धन हेतु विभिन्न आयोजनों के माध्यम से आदिवासियों की सेवा और उत्थान का उल्लेखनीय कार्य करने के लिए ‘डॉ. भंवर सिंह पोर्ते सम्मान‘ से विभूषित किया जाएगा।    संस्था द्वारा आदिवासी संस्कृति, कला, भाषा के उन्नयन, उत्थान तथा अनुसूचित जाति और जनजाति केे बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने, निःशुल्क ट्यूशन की व्यवस्था करने, आदिवासी समाज के महिलाओं को जागृत करने हेतु महिला सम्मेलन, महिला जागृति कार्यशाला आदि आयोजनों के माध्यम से महिला साक्तिकरण को बढावा देने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के महिलाओं को स्वरोजगार हेतु अगरबत्ती, मोमबत्ती, मशरूम, दोना-पत्तल आदि विषयों पर गांव के कम पढे लिखे महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार दिलाने, आदिवासी समाज एवं अनुसूचित जाति कों संगठित करने हेतु महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह, नशाबंदी, दहेज प्रथा, स्वच्छ भारत अभियान, टीकाकरण, भ्रुण हत्या, पर्यावरण, वृक्षारोपण, लोककला प्रशिक्षण शिविर तथा प्रतिवर्ष विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन कर आदिवासी समाज को संगठित करने में मदद करना तथा सम्मान के वरिष्ठ समाज सेवी, कलाकार, साहित्यकार, महिला समाज सेवी एवं जनप्रतिनिधियों आदि का सम्मान, गांव के शाला त्यागी बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करने तथा गरीब बच्चों को शिक्षा, स्कूल, कॉपी, किताब, पेंन पेंसिल हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने का उल्लेखनीय कार्य किया जाता है।

पं. लखनलाल मिश्र सम्मान
क्षेत्र: अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में
पुलिस विभाग

उप निरीक्षक श्री अमित पाटले को ‘पं. लखनलाल मिश्र सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा। उप निरीक्षक अमित पाटले का जन्म 27 मई 1983 में ग्राम-बेलटुकरी, जिला जांजगीर-चांपा के कृषक परिवार में श्री इन्द्र भूषण पाटले के घर में हुआ। अमिल पाटले की नियुक्ति दिनांक 25 सितम्बर 2008 को पुलिस विभाग में उप निरीक्षक के पद पर हुई। इन्होंने पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, चंदखुरी-रायपुर में बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त किया । प्रशिक्षण पश्चात जिला कोरिया में 02 वर्ष तक परिवीक्षाधीन उप निरीक्षक के पद पर कार्य सम्पादित किया । तद्परान्त  वर्ष 2011 में जिला रायगढ़ में पदस्थ होकर वर्तमान में थाना कोतवाली अन्तर्गत पुलिस चौकी जूटमिल में प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। सेवाकाल में इन्हें कुल 99 इनाम मिले है जिनमें सेवा पुस्तिका में प्रशंसा एवं नगद पुरस्कार शामिल है। उनका सेवा रिकार्ड भी उच्च कोटि का रहा है। दिनांक 24.02.2016 को पुलिस चौकी जूटमील जिला रायगढ़ में अप.क्र. 108/2016 धारा 363 भादवि के प्रकरण में 24 घंटे के भीतर अज्ञात आरोपी की पतासाजी कर गिरफ्तार करते हुए बालिका का शव बरामद कर प्रकरण से संबंधित भौतिक साक्ष्यों को संकलित करते हुए, रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट समयावधि में प्राप्त कर अपने उच्च बौद्धिक क्षमता एवं कार्यकुशलता का परिचय देते हुए साक्ष्यों को क्रमवार जोड़ते हुए, प्रकरण के आरोपी को दिनांक 25.02.2016 को गिरफ्तार कर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट टेªेक कोर्ट, रायगढ़ में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। फलस्वरूप दिनांक 17.06.2016 को न्यायालय द्वारा आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई।
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राजकीय सम्मानों के पैनल में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं इस ब्लॉग् के माध्यम से। साथ ही उन सभी सम्मानित महानुभवों को बहुत—बहुत बधाई...

Jayant sahu_जयंत




1.11.16

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया ‘जंगल सफारी’ का लोकार्पण

राज्योत्सव—2016 


रायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के शुभारंभ कार्यक्रमों की पहली कड़ी में  नया रायपुर में ‘जंगल सफारी’ का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। श्री मोदी ने जंगल सफारी में वृक्षारोपण करने के बाद सफारी का अवलोकन भी किया। उन्होंने इसके निर्माण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रदेश सरकार के वन विभाग को बधाई दी।
उल्लेखनीय है कि बहुमूल्य वन सम्पदा के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के वन्य जीवन का प्रतिरूप इस सफारी में देखने को मिलेगा। जंगल सफारी में जहां 50 एकड़ क्षेत्र में ‘बाघ सफारी’ (टाइगर सफारी) और 50 एकड़ क्षेत्र में भालुओं की ‘बीयर सफारी’ बनाया जा रहा है, वहीं 125 एकड़ क्षेत्र में चिड़ियाघर और 50 एकड़ क्षेत्र में ‘लायन सफारी’ भी बनाया जा रहा है। इसी तरह ढाई एकड़ के क्षेत्र में क्रोकोडायल प्रदर्शन क्षेत्र भी इस जंगल सफारी का आकर्षण बनेगा। इसी तरह जंगल सफारी के लगभग 52 एकड़ क्षेत्र में जलस्रोत है, जिन्हें जलीय पक्षी के अनुकूल बनाया जा रहा है तथा रंग-बिरंगी विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए ‘बटर फ्लाई जोन’ विकसित करने की भी योजना है।  जंगल सफारी के 800 एकड़ और इससे जुड़े  बॉटनिकल गार्डन के 416 एकड़ क्षेत्र, इस तरह यहां कुल 1216 एकड़ के विशाल हरे-भरे प्राकृतिक पर्यावरण में पर्यटकों और पर्यावरण प्रेमियों को एक अद्भुत वातावरण मिलेगा। जंगल सफारी के बनने से राज्य में ना केवल पर्यावरण संरक्षण और सुरम्य वातावरण का निर्माण होगा, बल्कि वन पशुओं के साथ समीपता का एहसास भी होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 19 अक्टूबर 2012 को नया रायपुर में इस महत्वाकांक्षी योजना का भूमि पूजन और शिलान्यास किया था।
वन विभाग द्वारा जंगल सफारी के इस परिकल्पना को लगभग 800 एकड़ के क्षेत्र में और 200 करोड़ रूपए की लागत में मूर्त रूप प्रदान किया जा रहा है। इसमें वन्य प्राणियों के लिए जहां चारागाह और स्वच्छ जलाशय आदि का विशेष ध्यान रखा गया है, वहीं पर्यटकों और आगन्तुकों के लिए भी सभी उचित सुविधाओं जैसे सुगम पथ, टाइगर सफारी के अंदर चलने वाली सुरक्षित वाहन और परिसर में बैटरी से चलने वाले ईको फ्रेंडली वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। जंगल सफारी के 50 एकड़ के विशाल परिसर में बनाए गए ‘टाइगर सफारी’ में वर्तमान में तीन टाइगर खुले में विचरित करते हैं और इन्हें देखने के लिए पर्यटक सुरक्षित वाहनों में उनके बाड़े में पहुंचकर उनका अवलोकन करते हैं। इसी तरह 75 एकड़ के डीयर सफारी में 80 वन्य प्राणी है, जिसमें 51 चीतल, 5 सांभर, 6 नीलगाय, 8 कोटरी और 10 काला मृग हैं। 50 एकड़ के बीयर सफारी में 4 भालू हैं। इसके अलावा लायन सफारी का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में नंदनवन के 7 लायन को उनके छोटे बाड़े से यहां लाकर विशाल प्राकृतिक वातावरण में रखा जाएगा। राज्योत्सव के अवसर पर जंगल सफारी के रूप में राज्य के नागरिकों को अप्रतिम उपहार मिला है।
उल्लेखनीय है कि इस जंगल सफारी की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में 416 एकड़ के क्षेत्र में बॉटनिकल गार्डन को विकसित किया जा रहा है। यहां के 181 एकड़ क्षेत्र में फैले खण्डवा जलाशय की सुन्दर-सुरम्य पृष्ठभूमि में हरित वातावरण और जैव विविधता के रूप में पर्यटकों को प्रकृति का निकटता से अहसास होगा। इन प्रयासों से राज्य में पर्यावरण संरक्षण, विद्यार्थियों और नागरिकों को प्रकृति से प्रेम करने के साथ पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा।

जंगल सफारी का लोकार्पण के बाद अवलोकन करते प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी



प्रधानमंत्री श्री मोदी के हाथों छत्तीसगढ़ को मिली कई बड़ी सौगातें


रायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर नया रायपुर के अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान प्रदेशवासियों को अनेक बड़ी और महत्वपूर्ण सौगातें दी। उन्होंने नया रायपुर में जंगल सफारी, बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम, एकात्म पथ का लोकार्पण और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया। श्री मोदी ने पांच दिवसीय राज्योत्सव का शुभारंभ करते हुए प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।उन्होंने छत्तीसगढ़ सहित देश भर के लाखों करोड़ों किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा से पानी पहुंचाने के लिए ’सौर सुजला योजना’ का भी शुभारंभ किया। इसके अंतर्गत आकर्षक अनुदान पर किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पम्प दिए जाएंगे। राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह में राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, छत्तीसगढ़ के अनेक लोकसभा और राज्यसभा सांसद, विधायकगण तथा बड़ी संख्या में अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम मंडलों के पदाधिकारी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। जंगल सफारी के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को स्मृति चिन्ह के रूप में भगवान श्री गणेश की काष्ठ निर्मित प्रतिमा भेंटकर शुभकामनाएं दी। श्री मोदी ने जंगल सफारी में वृक्षारोपण भी किया। प्रधानमंत्री के हाथों आज राज्य को मिली सौगातों पर एक नजर -  

जंगल सफारी Jungle Safari

320 हेक्टेयर में जंगल सफारी का विकास। अक्टूबर 2012 में निर्माण शुरू। टाइगर, बीयर, हर्बीवोर और लॉयन सफारी शामिल। जंगल सफारी के बीच 131 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खण्डवा जलाशय है। जलाशय के बीच नेस्टिंग आइलैण्ड का विकास किया जाएगा। यह नया रायपुर के लिए एक ऑक्सीजोन है। लगभग 200 करोड़ रूपए की लागत से इस सफारी का निर्माण किया गया है। इसमें 50 एकड़ के रकबे में टाईगर सफारी और 50 एकड़ में भालुओं के लिए ’बीयर’ सफारी बनाया गया है। इसके अलावा 125 एकड़ में चिड़ियाघर और 50 एकड़ में लायन सफारी का भी प्रावधान है। रंग-बिरंगी तितलियों के लिए बटरफ्लाई जोन का निर्माण किया गया है। जंगल सफारी में पशु-पक्षियों के लिए करीब 52 एकड़ में जल स्त्रोत भी विकसित किए गए हैं।

जंगल सफारी पहुंच मार्ग रायपुर रेल्वे स्टेशन से नई राजधानी

जंगल सफारी में मोदी जी ने ​की फोटोग्राफी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नया रायपुर में ’नंदनवन जंगल सफारी’ के लोकार्पण के बाद वहां लगभग 800 एकड़ में फैले जैव विविधता वाले इस मानव निर्मित वन क्षेत्र का भ्रमण किया। प्रधानमंत्री ने राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह में विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए जंगल सफारी के अपने दिलचस्प अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने लोगों को बताया-आज मैंने वहां शेर की आंखों में आंखें डालकर उससे मुलाकात की। मुझे उसकी फोटो खींचने का भी मौका मिला। उल्लेखनीय है कि जंगल सफारी का लोकार्पण करने के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ सफारी का भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान टाईगर सफारी में उन्होंने शेर को देखा, जो बाड़े के जाली के बेहद करीब आ गया। श्री नरेन्द्र मोदी भी उसे पूरा मान सम्मान दिया और उसे देखकर न केवल अपनी गाड़ी रूकवाई, बल्कि खुद गाड़ी से उतरकर अपने कैमरे से उसकी फोटो खींची। इस भेंट के दौरान ऐसा लगा जैसे दोनों ने आमने-सामने खड़े होकर न केवल एक-दूसरे की आंखों में आंख डालकर बातें  कर रहे हों।

बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस)

रायपुर और नया रायपुर के बीच सार्वजनिक परिवहन। रायपुर में दो पिक-अप पॉइंट, नया रायपुर में 10 बस शेल्टर तथा 01 बस डिपो। दो कॉरिडोर में 42 कि.मी. रूट में नया रायपुर तथा रायपुर के बीच दस सेवा होगी। विश्व बैंक की सहायता से कुल 170 करोड़ की योजना है। 53 कि.मी. सायकल ट्रेक तथा पैदल पथ का निर्माण भी नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट (NMT) के तहत किया गया है। प्रथम चरण में 30 । AC बसों का संचालन किया जा रहा है। ITS (Intelligent Transport System) के तौर पर पूरी बीआरटीएस की बसों का संचालन होगा। इसमें ऑटोमेटेड टिकटिंग GPS कंट्रोल सिस्टम भी है।

एकात्म पथ

सीबीडी रेल्वे स्टेशन तथा राजधानी परिसर के बीच 2.25 कि.मी. लम्बाई और 200 मीटर की चौड़ाई में 30 करोड़ रूपए की लागत से एकात्म पथ का निर्माण किया गया है। सड़क के मध्य 100 मीटर चौड़े तथा 2.10 किमी लंबे क्षेत्र में आकर्षक उद्यान भी बनाया गया है। करीब 50 एकड़ के इस उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के 6 हजार से अधिक वृक्ष समेत 23 हजार पौधों का रोपण। एकात्म पथ पर गुलाब, सेवंती, जासवंत, मेहन्दी, चम्पा, चांदनी, सदाबहार, नीम, पीपल, कचनार, कामिनी, कुसुम, बादाम, बसंत रानी, पारिजातक समेत 65 विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए हैं। उद्यान में 1 लाख 13 हजार वर्ग मीटर घास लगाई गई हैं। उद्यान में 11 विभिन्न फव्वारे हैं। पैदल पथ तथा 4 कि.मी. सायकल ट्रैक है।इस पथ के मध्य रोटरी ऑब्जर्वेशन टॉवर प्रस्तावित है। एकात्म पथ में खैरागढ़ के चित्रकारों द्वारा मधुबनी, वरली, संथाल, गोन्ड, बांगला तथा बस्तर शैली में जीवन के विभिन्न अवसरों को उकेरा गया है। 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के शुभारंभ के अवसर पर एकात्मक मानववाद के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया।यह प्रतिमा संगरमर के पत्थरों से निर्मित है। जयपुर (राजस्थान) के पùश्री सम्मान प्राप्त शिल्पकार श्री अर्जुन प्रजापति ने इसका निर्माण किया है। यह प्रतिमा 150 मीटर व्यास के वृत्त वाली सड़क के बीच स्थापित की गई है। इस वृत्त का नामकरण पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर किया गया है। प्रतिमा अनावरण के संक्षिप्त कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, लोक निर्माण, आवास और पर्यावरण मंत्री  श्री राजेश मूणत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, आवास और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह तथा वरिष्ठ नेता श्री सौदान सिंह भी उपस्थित थे।

किसानों को सौर सुजला योजना की सौगात

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ सहित देश भर के उन किसानों को सौर सुजला योजना की सौगात की। जिनके खेतों तक परम्परागत तरीके से बिजली पहंुचाने में दिक्कते आ रही हैं। इस नई योजना में ऐसे किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने के लिए उन्हें आकर्षक अनुदान पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पम्प दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को साढ़े तीन लाख रूपए की लागत वाले तीन हार्सपावर का सिंचाई पम्प सिर्फ सात हजार रूपए के अंशदान पर मिलेगा। इसी तरह पिछड़ा वर्ग के किसानों को यह पम्प बारह हजार रूपए और सामान्य वर्ग के किसानों को 18 हजार रूपए में मिलेगा। वहीं पांच हार्सपावर वाले साढ़े चार लाख रूपए का कीमत वाले सिंचाई पम्प अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को दस हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को 15 हजार रूपए और सामान्य वर्ग के किसानों को 20 हजार रूपए में दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में वित्तीय वर्ष 2019 तक 51 हजार किसानों को इस योजना का लाभ दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें से 11 हजार किसानों को चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पम्प दिए जा रहे हैं।

देखे राज्योत्सव स्थल से Live-




प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ बैटरी चलित वाहन से किया विशाल शिल्प ग्राम का अवलोकन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नया रायपुर में राज्योत्सव स्थल पर ग्रामोद्योग विभाग द्वारा आयोजित विशाल शिल्प ग्राम का वैटरी चलित वाहन से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ अवलोकन किया। श्री मोदी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों की शिल्पकलाओं को बढ़ावा देने तथा इससे जुड़े हजारों शिल्पकारों की अद्भूत शिल्प कला की सराहना की। राज्य सरकार के ग्रामोद्योग विभाग द्वारा राज्योत्सव स्थल पर विशाल क्षेत्र में ग्रामोद्योग के सभी घटकों-रेशम, हाथकरघा, हस्तशिल्प, माटी कला और खादी बोर्ड के अलावा जेल विभाग और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 44 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें हाथकरघा के 13 स्टाल, हस्तशिल्प के 11 स्टाल, माटी कला बोर्ड के पांच और रेशम तथा खादी बोर्ड के तीन-तीन स्टाल लगे हैं। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के छह और जेल विभाग के भी तीन स्टाल लगे हैं। इन स्टालों में आकर्षक घरेलू उपयोगी सजावटी सामानों, हाथकरघा कपड़ों और बेलमेटल, लौह शिल्प, काष्ठ, पत्थर, टेराकोटा, बांस, भित्तीचित्र, तुमाशिल्प सहित विभिन्न विधाओं के शिल्पों का अनूठा संग्रह है।

श्री नरेन्द्र मोदी में ग्लोबल लीडर बनने की अपार क्षमता: डॉ. रमन सिंह


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि सिर्फ ढाई साल की अवधि में श्री मोदी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे नायक के रूप में उभरे हैं, जिनमें विश्व नेता (ग्लोबल लीडर) बनने की भरपूर क्षमता है। छत्तीसगढ़ को श्री मोदी का आशीर्वाद लगातार मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा-श्री मोदी ने विदेशों में भारत की पहचान बनाई है। डॉ. सिंह ने आतंकवाद के खात्मे के लिए श्री मोदी के नेतृत्व में हाल ही में हुए सर्जिकल स्ट्राईक का उल्लेख किया।
डॉ. सिंह ने कहा-श्री मोदी के मार्गदर्शन में देश में नक्सलवाद और आतंकवाद समाप्त होगा और भारत विकास की ऊंचाईयों तक पहुंचेगा। डॉ. सिंह ने कहा-प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने सिर्फ ढाई साल में विकास की एक लम्बी छलांग लगाई है। स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा-प्रधानमंत्री ने अपने इस महत्वपूर्ण मिशन के तहत सम्पूर्ण भारत को दो अक्टूबर 2019 तक खुले में शौचमुक्त घोषित करने का लक्ष्य दिया है। छत्तीसगढ़ में उनके इस मिशन के प्रति सभी लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रदेश के पंच-सरपंचों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, आम नागरिकों और ग्रामीणों सहित हम सबने मिलकर यह तय किया है कि प्रधानमंत्री के इस लक्ष्य को हम एक वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया जाए। उन्हें वर्ष 2019 का इंतजार नहीं करना होगा। छत्तीसगढ़ को हम लोगों ने दो अक्टूबर 2018 तक खुले में शौचमुक्त घोषित करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा-प्रधानमंत्री ने अपनी इस योजना के जरिए देश की करोड़ों माताओं और बहनों का सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा-श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार ने ’हमर छत्तीसगढ़’ योजना शुरू की है। श्री मोदी ने एक वर्ष पहले हमें ऐसी योजना बनाने का सुझाव दिया था। इस योजना के तहत राज्य के लगभग दो लाख पंचायत प्रतिनिधियों को रायपुर और नया रायपुर आमंत्रित कर विकास कार्यों का अवलोकन कराया जा रहा है। अब तक 25 हजार पंचायत प्रतिनिधि यहां का दौरा कर चुके हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा-जनता के आशीर्वाद से सरकार को चौथी बार भी छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा का अवसर मिलेगा। राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन की अध्यक्षता में आयोजित राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह में विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री श्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रीगण सर्वश्री अमर अग्रवाल, अजय चन्द्राकर, बृजमोहन अग्रवाल, केदार कश्यप, प्रेमप्रकाश पाण्डेय, पुन्नूलाल मोहले, राजेश मूणत, रामसेवक पैकरा, श्रीमती रमशीला साहू, दयालदास बघेल, महेश गागड़ा, भईयालाल राजवाड़े, विधानसभा उपाध्यक्ष श्री बद्रीधर दीवान, रायपुर लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर श्रीमती शारदा देवी वर्मा और सरपंच ग्राम पंचायत उपरवारा श्रीमती रामबाई साहू तथा प्रदेश के अनेक सांसद और विधायक भी मौजूद थे।

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