3.4.17

'न्याय का तीर्थ' इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्षगांठ

देश में न्याय व्यवस्था को अंतिम आदमी तक पहुंचाने के लिये सजग रूप से खड़ा कानून का मंदिर 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' अब अपनी स्थापना की 150 वीं वर्षगांठ मना रहा है। ज्ञात हो कि Allahabad High Court को मूल रूप से ब्रिटिश शासन के कार्यकाल में Indian high court act 1861 के अन्तर्गत आगरा में 17 मार्च 1866 को स्थापित किया गया था। सन् 1869 में इसे आगरा से इलाहाबाद स्थानान्तरित किया गया और 11 मार्च 1919 से इसे 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' नाम दिया गया। 25 फरवरी 1948 को, Uttar Pradesh Assembly ने एक प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल द्वारा गवर्नर जनरल को यह अनुरोध किया गया कि अवध चीफ कोर्ट लखनऊ और इलाहाबाद हाई कोर्ट को मिलाकर एक कर दिया जाये। इसका परिणाम यह हुआ कि लखनऊ और इलाहाबाद के दोनों (प्रमुख व उच्च) न्यायालयों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय नाम से जाना जाने लगा तथा इसका सारा कामकाज इलाहाबाद से चलने लगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले समारोह के अवसर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुये भारत के Prime Minister Mr. Narendra Modi ने कहा कि कानून का लक्ष्य अन्तिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था ऐसी हो कि सबको न्याय आसानी से सुलभ हो। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक तर्कसंगत बनाने के साथ-साथ वादों के त्वरित निस्तारण पर भी बल दिया। श्री मोदी ने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी नये भारत का संकल्प लें और हर क्षेत्र में नयी उमंग व ऊर्जा  से नव निर्माण में लग जाएं। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को साकार करते हुए सभी देशवासी देश को एक नयी पहचान देने में मदद करें। उन्होंने Jurists, advocates सहित समाज के हर वर्ग के लोगों से अपील की कि वे नव भारत के निर्माण के साथ विजन-2022 के संकल्प को पूरा करने में लग जाएं, ताकि देश प्रगति की नयी ऊँचाइयों को हासिल करते हुए एक महाशक्ति के रूप में विकसित हो सके। 
Allahabad High Court  के गौरवशाली अतीत का विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के दौरान यहां के न्यायविदों और अधिवक्ताओं ने जिस भूमिका का निर्वहन करते हुए हमें आजादी दिलायी और आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र को जो मजबूती दी, उससे पूरा देश गौरवान्वित है। केन्द्र सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने का जिक्र करते हुए Prime minister ने कहा कि देश में लागू छोटे-बड़े लगभग 1200 कानूनों का अध्ययन कर उनका सरलीकरण किया गया है। न्याय के क्षेत्र में Modern technology की पुरजोर वकालत करते हुए Prime minister ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की सराहना की कि उन्होंने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। उन्होंने Central government की ओर से हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को न्याय का तीर्थ बताते हुए कहा कि यहां के न्यायविदों ने भारतीय लोकतंत्र को अथाह ऊर्जा दी है। 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक वर्ष के समारोहों की सफलता पर Prime minister ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायमूर्तियों व अधिवक्तागणों की सक्रियता की मुक्तकंठ से सराहना की। 
इस अवसर पर भारत के Chief Justice Mr. J. s. Khehar ने अपने उद्बोधन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस उच्च न्यायालय ने भारत को 5 मुख्य न्यायाधीश दिए हैं। Prime minister के नव भारत के संकल्प के साथ मन की बात की चर्चा करते हुए Chief Justice ने न्यायालयों में बड़ी संख्या में लम्बित वादों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि Supreme Court से लेकर High Courts और Subordinate courts के न्यायमूर्तिगण कम से कम 5-10 दिन का समय निकालते हुए लम्बित मामलों को सूचीबद्ध कर निस्तारण की कार्य योजना बना लें, तो निश्चित रूप से अकेले सर्वाेच्च न्यायालय के 80-85 जज अपनी इस छोटी से सैक्रिफाइस से लम्बित वादों के बोझ को कम कर सकते हैं। इस अवसर पर न्यायिक इतिहास में Allahabad High Court की स्थापना के-1866 से 100 वर्ष यानि 1966 के अवसर पर प्रकाशित पुस्तक का मुख्य न्यायाधीश ने विमोचन किया।

समारोह को उत्तर प्रदेश के नव निर्वाचित Chief Minister Shri Yogi Adityanath ने भी संबोधित किये। योगी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर जब-जब संकट आया है, तब-तब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उच्च मानदण्डों की स्थापना करने के साथ लोकतंत्र की रक्षा की है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देश में न्याय का बड़ा मंदिर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों, शोषितों, वंचितों और महिलाओं को सर्वसुलभ न्याय दिलाने में इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित अधीनस्थ न्यायालयों की बहुत बड़ी भूमिका है। न्यायालयों में उच्च तकनीकी और अवस्थापना सुविधाओं को उपलब्ध कराने में प्रदेश सरकार हर सम्भव मदद करेगी। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि 14 वें वित्त आयोग ने न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समस्त राज्यों के लिए कुल 9748 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की अनुसंशा की है। इस राशि में से 915 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश के लिए इंगित हैं, जिसमें से 488 करोड़ रुपए केवल Fast track court जघन्य अपराध, वरिष्ठ नागरिक, महिला, बच्चों एवं दिव्यांगों के लिए रखे गए हैं। 
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्षगाठ के अवसर पर सर्वाेच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री दीपक कुमार मिश्रा, केन्द्रीय कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, मुख्य न्यायाधीश श्री दिलीप बाबा साहेब भोसले, उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश के विधि एवं न्याय मंत्री श्री बृजेश पाठक, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के अध्यक्ष श्री अनिल तिवारी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री बी.के. शुक्ला, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी, न्यायमूर्ति श्री तरुण अग्रवाल, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, अन्य उच्च न्यायालयों के वर्तमान एवं भूतपूर्व न्यायमूर्तिगणों सहित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्तागण उपस्थित थे।
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पत्र सूचना शाखा उ.प्र., पत्र सूचना कार्यालय-भारत सरकार।

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