31.8.18

संतान प्राप्ति व उनके दीर्घायु की कामना का व्रत 'कमरछठ'

लोकपर्व कमरछठ विशेष-:

संतान प्राप्ति व उनके दीर्घायु की कामना का व्रत कमरछठ : जयंत साहू




छत्तीसगढ़ में माताएं अपने संतानों की दीर्घायु तथा सुखमय जीवन की कामना के लिए कठिन व्रत रखती है जिसे कमरछठ कहा जाता है। इसे कमरछठ के अलावा हलषष्ठी, खमरछठ, हलछठ आदि नामों से भी जाना जाता है। कमरछठ का व्रत माताएं भाद्रपद मास में कृष्णपक्ष की छठी तिथि को रखती है। व्रत के दौरान गांव की सभी महिलाएं एकत्रित होकर किसी एक स्थान पर सगरी (जलाशय का प्रतिरूप) बनाती और उसके किनारे को काशी व अन्य पुष्पों से सजाया जाता है। सगरी के पास ही भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा किया जाता है।


सगरी के पास ही बैठकर माताएं कथा सुनती है, सगरी की परिक्रमा करती है और अपने-अपने संतानों की सुखमय जीवन की कामना करती हुई सगरी में जल अर्पण करती है। 'कमरछठ' व्रत में फलाहार के रूप में ऐसे भोजन और साग-सब्जी का उपयोग किया जाता हैं, जिसे हल आदि के द्वारा न बोया गया हो, अर्थात प्राकृतिक रूप से उत्पन्न वस्तुओं को ही ग्रहण करती हैं। जिसमें पसहर चावल के अलावा के साथ छ: प्रकार के अन्न धान की लाई, भुना हुआ चना तथा महुआ, गेहूँ, अरहर व छ: प्रकार की भाजी (मुनगा, कद्दु ,सेमी, तोरई, करेला, मिर्च), भैंस की दूध-दही आदि को महुआ पत्ते के दोना और पत्तल में भरकर भोग लगाया जाता है व ग्रहण किया जाता है। 

कमरछठ की 10 विशेष बातें -:



  • 1. यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। माताएं संतान प्राप्ति व उनके दीर्घायु सुखमय जीवन की कामना रखकर को रखती है।
  • 2. इस दिन माताएं सगरी बनाकर भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं और उनके पुत्र के समान ही श्रेष्ठ पुत्र की कामना करती हैं।
  • 3. इस दिन फलाहार के रूप में ऐसे भोजन और साग-सब्जी का उपयोग करती हैं, जिसे हल आदि के द्वारा न बोया गया हो, अर्थात प्राकृतिक रूप से उत्पन्न वस्तुओं को ही ग्रहण करती हैं। जिसमें पसहर चावल आदि शामिल होते हैं।
  • 4. इस पूजन की सामग्री मे पसहर चावल, महुआ के पत्ते में धान की लाई, भैस के दुध दही व घी आदि रखते है।
  • 5. सगरी में बच्चों के खिलौनों जैसे भौरा बाटी आदि भी रखा जाता है साथ ही हरेली में बच्चों के चढ़ने के लिए बनाया जाता है को भी सगरी में रखकर पूजा करते है।


  • 6. सगरी के पास बैठ कर व्रत रखी हुई माताएं हलषष्ठी माता के छः कहानी को कथा के रूप में श्रवण करते है।
  • 7. 'कमरछठ' व्रत के बारे में अनेक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसमें से एक देवकी-वसुदेव की कथा है। वसुदेव और देवकी के बेटों को एक-एक कर कंस ने कारागार में मार डाला। जब सातवें बच्चे के जन्म का समय नजदीक आया तो देवर्षि नारद जी ने देवकी को हलषष्ठी देवी के व्रत रखने की सलाह दिया। देवकी ने इस व्रत को सबसे पहले किया जिसके प्रभाव से उनके आने वाले संतान की रक्षा हुई। 
  • 8. हलषष्ठी का पर्व भगवान कृष्ण व बलराम जी से भी संबंधित है। हल से कृषि कार्य किया जाता है। बलराम का प्रमुख हथियार भी है। बलदाऊ भैया कृषि कर्म को महत्व देते थे, वहीं भगवान कृष्ण गौ पालन को। इसलिए इस व्रत में हल से जुते हुए जगहों का कोई भी अन्न आदि व गौ माता के दुध दही घी आदि का उपयोग वर्जित है। उत्तर भारत में इसे हलधर बलराम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है तथा दक्षिण में कुमार कार्तिकेय जयंती के रूप में मनाया जाता है।
  • 9. इस व्रत मे पूजन के बाद माताएँ अपने संतान के पीठ वाले भाग मे कमर के पास  पोता (नये कपड़ों का टुकड़ा - जिसे हल्दी पानी से भिगाया जात) मारकर अपने आँचल से पोछती है जो कि माता के द्वारा दिया गया रक्षा कवच का प्रतीक है।
  • 10. इस व्रत-पूजन मे छः की संख्या का अधिक महत्व है। जैसे- भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष का छठवाँ दिन,  छः प्रकार का भाजी , छः प्रकार के खिलौना,  छः प्रकार के अन्न वाला प्रसाद तथा छः कहानी की कथा ।





संकलनकर्ता-
 जयंत साहू, डूण्डा, रायपुर छत्तीसगढ़ 09826753304

21.8.18

नया रायपुर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित अब कहलायेगा अटल नगर

छत्तीसगढ़ सरकार की अटल जी को श्रद्धांजलि पुष्प-

  •  नया रायपुर का नामकरण अटल नगर
  • सभी जिला मुख्यालयों में लगेगी अटल जी की प्रतिमा
  • अटल जी नाम पर सेंट्रल पार्क
  • राष्ट्रीय स्तर के कवियों के लिए अटल जी के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना
  • बिलासपुर विश्वविद्यालय और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज का नामकरण अटल जी के नाम पर
  • मड़वा ताप बिजली परियोजना और रायपुर शहर के एक्सप्रेस वे का नामकरण भी अटल जी के नाम पर





देश ने अटल के रूप में क्या कुछ खोया ये उनके जाने के बाद जाना है। किसी के लिये वे राजनेता थे तो किसी के लिये वे महान कवि, कोई उन्हे युगपुरूष मानता है तो कोई सच्चा राष्ट्रभक्त आज हर कोई उनको याद करके गमगीन हो रहा है। भारत देश ही अपितु बाहर के कई देश अटल जी को याद करते हुये शोक मना रहे है। ऐसे महान पुरूष ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया है ये प्रत्येक छत्तीस​गढ़ वासियों के लिये गर्व की बात है। जब अटल जी की निधन की खबर आई उस समय देश अपनी आजादी की 72 स्वतंत्रता दिवस के जूनून में था। हर तरफ आजादी के तराने गुंज रहे थे फिर अचानक ही अटल जी की कविताएं गुंजने लगी। उनके कृतियां पुन: प्रकाशित होने लगी, कविताओं का वाचन होने लगा। सही मायने में यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि थी।
अटल जी ने अपने अंतिम समय में अपने द्वारा खड़ी की गई पार्टी को शिखर पर देखा है, निश्चित ही पार्टी भी उनके नाम को शिखर पर ही स्थापित करेगी। 

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी ओर से सबसे बड़ी घोषणा कर दी है, नया रायपुर में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह ऐलान किया है कि नया रायपुर का नाम अब अटल नगर होगा। उन्होने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए नया रायपुर का नामकरण अटल नगर करने और वहां अटल जी की मूर्ति स्थापित करने और वहां सेंट्रल पार्क का नामकरण भी उनके नाम पर करने और नया रायपुर में ही अटल स्मारक बनाने सहित राज्य में उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाये रखने के लिए और भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नया रायपुर के अलावा प्रदेश के सभी 27 जिला मुख्यालयों में अटल जी की प्रतिमा लगायी जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की ओर से यह भी घोषणा की गई है कि बिलासपुर विश्वविद्यालय और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज का नामकरण अटल जी के नाम पर करने तथा राष्ट्रीय स्तर के कवियों के लिए अटल जी के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना और प्रदेश सरकार के द्वितीय चरण की विकास यात्रा को अटल विकास यात्रा के नाम से आयोजित होगी। इसके अलावा मड़वा ताप बिजली संयंत्र और राजधानी रायपुर में पूर्ववर्ती नेरोगेज पर बन रहे एक्सप्रेस वे कलेक्टोरेट के बगीचे का नामकरण भी स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया जाएगा। 

अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन ​परिचय- 


अटल जी का जनम 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ ​था। उनके पिता का नाम पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम श्रीमती कृष्णा वाजपेयी है। उनके पिता ग्वालियर में अध्यापन कार्य करते थे। अटल जी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर में हुई तथा वे कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एम.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में एल.एल.बी. की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये।

अटल जी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और सन् १९६८ से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। सन् १९५७ में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे। ६ अप्रैल १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया।

दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् १९९७ में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। १९ अप्रैल १९९८ को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।

पुरस्कार को मिले पुरस्कार-

  • 1992 में पद्म विभूषण, 
  • 1993 में डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय), 
  • 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 
  • 1994 में श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार, 
  • 1994 में भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, 
  • 2015 में डी लिट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय), 
  • 2015 में 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड', (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त), 
  • 2015 में भारतरत्न से सम्मानित,


अटल जी की कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ-

  • मृत्यु या हत्या
  • अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)
  • कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
  • संसद में तीन दशक
  • अमर आग है
  • कुछ लेख: कुछ भाषण
  • सेक्युलर वाद
  • राजनीति की रपटीली राहें
  • बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि
  • मेरी इक्यावन कविताएँ

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