3.1.18

ब्लेकमनी से हंसाने आ रहे हैं - Udanchhoo

० प्रेम चोपड़ा अपने पुराने अंदाज में फिर लौट रहे पर्दे पर
० आशुतोष राणा का हास्य अवतार
० अध्यात्म के नाम पर काले व्यापार का पर्दाफाश


नव वर्ष 2018 की शुरूआत में यदि आप बॉलीवुड सिनेमा से अच्छी और पैसा वसुल फिल्म की उम्मीद करते है तो आपकी मुराद जरूरी पूरी होने वाली है क्योंकि कॉमेंडी मूवी 'उड़नछू' का टे्रलर लॉंच कर दिया गया है और देश से सभी सिनेमा घरों में 5 जनवरी से एक साथ रिलीज कर दी जायेगी। विपिन पराशर के निर्देशन में बनी फिल्म 'उड़नछू' के निर्माता है रविन्द्र सिंह। आर. विजन इंडिया प्रा.लि. के बैनर तले बनी फिल्म में 'प्रेम नाम है मेरा... प्रेम चोपड़ा' ये डायलॉग आपको फिर गुदगुदायेंगे। भले ही इसे आप खुद प्रेम चोपड़ा जी के मुंह से कई बार सुनते आये होंगे एक खलनायक के रूप में लेकिन इस फिल्म वे खूब हसने-हॅसाने के मूड हैं। 

टे्रलर देखकर तो यही लगता है कि इसमें रोमांटिक हास्य के साथ-साथ सामयिक पॉलिटिक्स पर व्यंग्य करने की कोशिश की गई है। अपने जमाने के बेहतरीन कलाकार प्रेम चोपड़ा वैसे तो कई फिल्मों में कॉमेडी करते नजर आये, उनकी कॉमेडी करने का अंदाज ही अलग होता है। निगेटिव पात्रों को हास्य कराना या करना एक जाखिम भरा काम होता है और हर जोखिम भरे काम को प्रेम चोपड़ा बड़े ही प्रेम के साथ करते है। 

विपिन पराशर का निर्देशन काफी अच्छा है, उन्होंने कलाकारों पर ज्यादा कुछ करने की कोशिश भी नहीं की है। प्रेम चोपड़ा, रजनीश दुग्गल अपने अंदाज में ही लगे हा आशुतोष राणा के उपर थोड़ा प्रयोग किया गया है कि सफल रहा। विशाल और वैभव की कथा व पटकथा फिल्म को समय पर शुरू और अंत करने के अलावा कुछ नयापन नहीं ला पाये किन्तु संवाद पूरी फिल्म में लोगों को गुदगुदाते रहते हैं। गीत और संगीत की बात की जाये तो आइटम नबंर आज के समय के हिसाब से बढ़िया है। 

उड़नछू में एक और खास बात है वह है आशुतोष राणा, जो कि इसमें कॉमेडी करते नजर आ रहे है। उनको अब तक सिरियस टाइप के रोल में ही देखते आये लेकिन लोफर और हास्य भी उनके अंदर खूब भरा है जो इस फिल्म में देखने को मिल रहा है। फिल्म में मुख्य भूमिका में प्रेम चोपड़ा और आशुतोष राणा के अलावा रजनीश दुग्गल, बरूना अब्दुल्ला, साइशा सहगल भी अहम किरदार में नजर आये।

अब फिल्म में कहानी की बात की जाये जो यह गुरू जी यानी प्रेम चोपड़ा से स्टेरी की शुरूआत होती है जो कि एक आध्यात्मिक गुरू है और लोगों की ब्लेक मनी को सफेद करने का काम करते है। साथ में है विक्रम यानी रजनीश दुग्गल और साइशा सहगल यानी शाक्ति। गुरु जी बड़े ही ईमानदारी के साथ अपने भक्त बिल्लू (आशुतोष राणा)और जूलिया (बरूना अब्दुल्ला) की सहायता से अपने आश्रम के माध्यम से काला धन का संचालन करते हैं। फिल्म हास्य के साथ-साथ समाज के कई पाखंडों से भी पर्दा उठाती है कि आश्रमों में कैसे-कैसे खेल होते है और संतों का चरित्र अब कैसा हो गया है। गुरू जी का जो पात्र है वह बहुत ही पाखंड़ी टाइप का है और उनके लिये अध्यात्म और आश्रम महज एक आडंबर और व्यापार का अड्डा है। फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है वैसे-वैसे अजीबो-गरीब वाक्या, नाटकीय घटनाचक्र लागों को हॅसाने का काम करते है और एक दुखद घटना के साथ फिल्म का अंत हो जाता है।

फिल्म का नाम- उड़नछू
निर्देशक- विपिन पराशर
निर्माता- रवींद्र सिंह 
कहानी/पटकथा- विशाल वी.पाटिल, वैभव वाजपेयी
संगीत- अविशेक मजूमदार, प्रवीण-मनोज







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