7.6.17

आखिर हिंसक क्यों हुये किसान?


मध्यप्रदेश के किसान विगत कई दिनों से अपने विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे कि अचानक ही छठवें दिन ऐसा क्या हो हुआ जो उन्होंने अपनी दिशा बदल ली। उग्र होकर हिंसा के रास्ते पर चल पड़े। जो सामने आया उस पर ही अपनी भड़ास निकालने लगे। जान-माल की क्षति पहुंचाने को आंदोलन का हिस्सा मानने लगे और पुलिस-प्रशासन ने भी उन्हे संभालने के बजाये अपनी कार्यवाही में गोली से जवाब देकर मामला और भी बिगाड़ दिये। किसान कर्ज माफी और फसलों के दाम बड़ाने जैसे मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। मांग भी जायज है, किसानों को अपनी मेहनत का वाजिब दाम पाने का हक है। कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश के गांवों में पहले से ही पंचायत और जनपद स्तर पर किसान एकजुट होकर आंदोलन की रूपरेखा बना रहे थे। उनके साथ कई किसान नेता भी शामिल रहे जो राजनीति में भी अच्छी पैठ रखते है। जब किसानों के बीच इस तरह की रूपरेखा बनाई जा रही थी, जिसमें किसान नेता सरिक थे तो फिर उन्होंने शांति से बातचीत के द्वारा मामले को क्यों नहीं सुलझाया? 

किसानों के बीच सुलग रही आंदोलन की चिंगारी को बुझाने की सरकार ने भी कोशिश नहीं की। कहा तो यह भी जा रहा है कि प्रदेश के मंत्रियों को इस बात की जानकारी थी फिर भी वें ये बयान देते रहे कि उग्र आंदोलनकारी किसान नहीं बल्कि असमाजिक तत्व है तो हिसंक कृत्यों को अंजाम दे रहे है, किसान तो सरकार से बातचीत कर अपना आंदोलन समाप्त कर चुके है। यदि मंत्री जी इस तरह का बयान न देकर सीधे मुख्यमंत्री को इस बात से अवगत करते तो वाक्या कुछ और होता। ये नई पीढ़ी के किसान नेता है जो उग्र और हिंसक होकर आंदोलन को अंजाम दे रहे है जिसमें अंदर से कहीं न कहीं राजनैतिक हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

पश्चिमी मध्यप्रदेश में मंदसौर के किसानों ने जिस तरह की हरकत किये रेल रोकना, पटरियां उखाड़ना, मारपीट करना, गांड़ियों में आग लगाना आदि काम लगता नहीं कि ये किसानों का है। परिश्रम और सेवा धर्म से अभिभूत धरती पुत्रों के अंदर ये हिंसा का भाव समाज ने ही ठूसे है। प्रशासन ने घोर लापरवाही बरतते हुये उग्र किसानों पर गोली चलवाए, हिंसा के राह पर भटके किसानों को प्रशासन ने भी हिंसा से ही जवाब देकर आंदोलन के अंजाम को मरने मारने तक पहुंचा दिये। किसानों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिये हिंसक बने तो प्रशासन उनकी मुंह दबाने के लिये हिंसक हुये। मंदसौर सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों में कर्फ्य लगा दिया गया है। 6 किसानों की मौत और कितनों के जख्मी होने के बाद मध्यप्रदेश का हालात और भी बिगड़ सकता है जब राजनेता अपने-अपने राजनैतिक रोटी सेकने किसान आंदोलन पर बयान बाजी करेंगे। स्पष्ट रूप से कहा जाये तो शासन-प्रशासन की नाकामी और लापरवाही साफ दिखाई दे रहा है। आंदोलनकारियों के हिंसक होने के जिम्मेदार भी कुछ हद स्थानीय जनप्रतिनिधी है। समय पर किसानों की मांगों पर यदि शासन ने सकारात्मक पहल की होती तो किसान आंदोलन समाप्त हो गया होता।

हिंसा के बाद मध्यप्रदेश का हालात कश्मीर और गुजरात सा हो गया है, प्रशासन ले कर्फ्य और धारा 144 लगा दी है, इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद है। किन्तु राजनैतिक बयान-बाजी पर कोई लगाम नहीं लग पा रहा है। प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल कर प्रमुख विपक्षी दल के नेता घटना स्थल पर मरहम के बजाये आग में घी डालने में लगे है। किसानों के आंदोलन को सही और जायज बताने वाले नेताओं को हिंसक घटना और मौत का खूनी खेल छोड़कर किसान हित में मामलें को शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। 
पीड़ितों को अपना हक मांगने का पूरा अधिकार है पर ये तरीका उचित नहीं है। उनकी हरकते देखकर लगता नहीं कि ये वही किसान है जो दिन-रात खेतों में मेहनत कर अनाज पैदा कर दुनिया का भरन-पोषण करते है। असमाजिक तत्वों की भांति रेल की पटरियां उखाड़ना, किसी की वाहन को आग लगा देना, चक्का जाम करना, मरने-मारने पर आतुर होना। इस तरह के व्यवहार से शासन-प्रशासन से ज्यादा तो आम लोगों को नुकसान हो रहा है। सड़क और रेल मार्ग अवरूध होने से आम जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है न की शासन-प्रशासन की कमर टुटती है। एक तरह से कहा जाये तो मंदसौर का किसान आंदोलन अपने ही हाथों अपना हाथ जलाने वाला रहा है जिसमें नेता और अफसर तमास देखने वाले रहे।

घटना के बाद ज्यादा तनावग्रस्त इलाकों में कर्फ्यू और अन्य क्षेत्रों में धारा 144 लागू हुई और मौत पर सरकारी मरहम लगाई गई जिसमें मृतक के परिवार के किसी एक सदस्य को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी और एक करोड़ का सहायता राशी। घायलों को सरकारी ईलाज के साथ 5-5 हजार रूपये आर्थिक मदद देना का घोषणा मुख्यमंत्री की ओर से हुई है। न्यायिक जांच के आदेश दे दिये गये है। बहरहाल सरकार का न्यायिक जांच जो भी कहे पर किसान आंदोलन को हिंसक बनाने में पक्ष-विपक्ष दोनों के किसान नेताओं का ही हाथ है, बेचारे किसान तो बलि का बकरा बने है। भीड़ को उकसाने के बाद घटना स्थल से गायब हुये नेता खुले आम टीवी चैनलों में दोषारोपण का धारावाहिक बना रहे हैं, ऐसे नेताओं पर कार्यवाही हो किसानों को अपना जायज हम मिले। प्रशासन भी आंदोलन को हल्के में लेने की भूल सुधारते हुये, प्रदेश के किसानों के बजाये उन्हे हिंसक बनाने वाले नेताओं पर नकेल कसे। आम किसानों को बाहरी नेताओं को दूर रखा जाये। हालात का जायजा लेने के नाम पर बाहरी नेता को घटना स्थल पर जाने से रोका जाये क्योकि उनका बेतुका बयान हालात को और बिगाड़ने का काम करेगा।
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5.6.17

पर्यावरण नित्यम् संकल्प


"पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की भावनाएं गजब की है .... वो गंदा करता है तो मैं क्यों न करू। जल, जंगल और जमीन के साथ खिलवाड़ करने वाला एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के लिये नुकसान दायक नहीं है अपितु वह समाज के लिये घातक है। पर्यावरण संरक्षण का कानून इतना प्रभावी और कारगर हो कि व्यक्ति, समाज और स्वयं प्रशासन भी जल, जंगल और जमीन को टेड़ी नजरों से न देख सके।" 
..... लो भई फिर आया है ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ यानी 5 जून का पावन बेला। गांव, शहर और महानगर जोर-शोर से आयोजन की तैयारी में लगा है, जगह-जगह मंडप सज रहा है। मौसम के अनुकूल अतिथियों के आदर-सत्कार के लिये कूलर, पंखे, फूलमाला, शुद्ध-शीतल पेय, ताजा-गरम नास्ता। हजारों नग हरा टोपी, स्लोगन लिखा हुआ टी शर्ट, छोटी-छोटी प्लास्टिक के थैलियों में नन्हे पौधे आदि। 
अजी... थोड़ा बहुत दिखावा और खर्चा तो करना ही पड़ेगा आखिर काम के साथ नाम भी बड़ा है.... ’विश्व पर्यावरण दिवस’। और अब आयोजन में पधारे नेताओं की बात करे तो आजकल के अतिथि केवल आदर-सत्कार के भूखे नहीं है, उन्हे खाना न दो तो भी चलेगा पर भाषण सुनने के लिये सौकड़ों से हजारों की भीड़ चाहिए।


हर साल की तरह.....। उच्चाधिकारियों का कनिष्ठों को सक्त निर्देश मिला है कि ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ अनिवार्य रूप से अपने-अपने स्तर में मनाये। पर्यावरण के प्रति आम लोगों को जागरूक करे। पर्यावरण को बचाये रखने का संकल्प दिलाये। पानी बचाव और साफ-सफाई के नारे लगवाए। ....वगैरह-वगैरह जनजागरूकता के काम करने है। चूकि इस आयोजन के लिये सरकारी फंड प्राप्त होता है तो किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं होनी चाहिये भले ही प्रस्तावित बजट से अधिक धन खर्च क्यो न करना पड़े। कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने में मेहनत करने की कतई आवश्कता नहीं पिछले वर्ष का नोटशीट देखों और दो गुणा बजट के साथ लूट लो वाहवाही। अखबारों की सुर्खियां बनो, आंकड़े देने में तनिक भी संकोच मत करो, कह दो कि इस वर्ष लगभग एक करोड़ पौधा लगाया जायेगा। 
कुछ लोगों का तो काम है उंगली करना वो कहेंगे कि-"पिछले कई सालों से इस तरह का आयोजन होता आ रहा है। पर नतीजा कुछ नहीं निकलता। आयोजन वाले ही कार्यक्रम स्थल में खाली पानी की बोतले, नास्ते का पैकेट, मंच का कचरा सड़क पर फेक भागते है। तपती धूप में मंच के नीचे आम जनता, स्कूली बच्चे और गांवों से बुलाये भीड़। हजारों लोग एक साथ पर्यावरण को बचाने के लिये संकल्प लिये। तीन मिलोमीटर तक मनाव श्रृंखला बनाई गई.....।" ऐसी बातों को विराधी खेमे का विचार करार देते हुये इस बात को भी नजर अंदाज करों कि पिछले वर्ष लगे पौधों की वर्तमान में क्या स्थिति है? जिंदा है भी कि उगे ही नहीं।
"अपना ध्येय सिर्फ यही रखों कि लागों को जगाने के लिये इस तरह के आयोजन करने पड़ते है बाद में कौन याद रखता है। जो कुछ भी करना है आज ही दिन कर डालो, फटाफट संकल्प ले डालो। एक साल बाद आया है 5 जून, ’विश्व पर्यावरण दिवस’।"


समझ में नहीं आता लोग ऐसा संकल्प क्यों ले लेते है जो पल भर में ही टूट जाता है। प्राण वायु को साक्षी मानकर वायु प्रदुषण न करने का संकल्प लेते है और मोटरसाइकल, कार आदि से हवा में जहर घोल देते है। दूसरी तरफ कारखानों से निकलने वाला काला धुआ जिंदगी को कम कर रहा है। अफसोस कि कई कारखाने तो महानगर के आबादी वाले क्षेत्र में ही चल रहे है। जीवनदायनी जल को साक्षी मानकर पानी को गंदा नहीं करने का संकल्प लेते है और घरों से निकलने वाली नाली की धार को नालों और तालाब की ओर मोड़ देते है। पेड़ को साक्षी मानकर संकल्प लेते है और अंधाधुंध जंगल की कटाई को मौन देखते है। ऐसे मामलों के लिये पर्यावरण मंत्रालय को और कठोरता से नियम बनाने की आवश्कता है। जल, जंगल और जमीन से जुड़े हरेक मामले में पर्यावरण मंत्रालय का दखल हो। मौजूदा कानून से भिन्न नये कानून बने और बाकायदा उसमें कठोर सजा का प्रावधान हो। जल, जंगल और जमीन के साथ खिलवाड़ करने वाला एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के लिये नुकसान दायक नहीं है अपितु वह समाज के लिये घातक है। पर्यावरण संरक्षण का कानून इतना प्रभावी और कारगर हो कि व्यक्ति, समाज और स्वयं प्रशासन भी जल, जंगल और जमीन को टेड़ी नजरों से न देख सके।
प्राकृतिक रूप से जो हमारे आसपास का वातावरण है वो अब बनावटी हो रहा है। आंगन में लगा बरगद का पेड़ अब गमले में आ सिमटा है। खुद के पाने का पानी मशीनों से शुद्ध करते है और जलिय जीवों को अपने घरों की गंदगी देते है। हमारा और आपका दम छोटे से कमरे में घुटने लगता है तो हम जंगल काटकर महल बनाने लग जाते है। ये सोचने की फुरसत तक नहीं हमारे पास की जंगल के कटाई के बाद वहां के जीव कहा जायेंगे? पेड़ कटा सो अलग। 
पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की भावनाएं गजब की है ...... वो गंदा करता है तो मैं क्यों न करू। "वो और मैं" ही पर्यावरण का कबाड़ा कर रखा है। यदि हम वाकई पर्यावरण के प्रति चिंतित है तो हमें किसी दिन विशेष की प्रतिक्षा नहीं और न ही दिखावे का संकल्प। प्राकृतिक रूप से कुदरत ने जो हमें दिये है बस ज्यों का त्यों उसकी हिफाजत करें। जितना जरूरी उतना ही उपयोग इस शर्त के साथ की बदले में हम भी प्रकृति को वहीं लौटायेंगे।

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- जयंत साहू
पता- डूण्डा वार्ड-52
पोस्ट- सेजबहार रायपुर छत्तीसगढ़
मोबाइल-9826753304


29.5.17

अनुष्का शेट्टीः राजमाता शिवगामी का घमंड और देवसेना के गुरूर से बाहुबली-2 सुपर-डुपर हिट



सिनेमा जगत की बुलंदी पर गुरूर के साथ खड़ी अनुष्का शेट्टी ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत तेलगू फिल्म से की जो 2005 में रिलीज हुई थी। अनुष्का पहली ऐसी भारतीय अदाकारा है जिसने हिन्दी, तमिल और तेलगु तीनों भाषाओं में सफलता हासिल की है। अनुष्का शेट्टी ने पुरी जगन्नाथ की फिल्म 'सुपर' से पर्दे पर डेब्यू किया, बाद में उसी साल महानदी में दिखाई दी। इसके बाद कई और फिल्में आई जैसे- विक्रमकुडू, एस्ट्राम, रेंदू, स्टालिन, लक्ष्यम, डॉन, ओका मैगाडु, स्वागतम, बालादुर, चिंतकायाला रवि, किंग, अरूंधति, बिल्ला, वेतेईककरन, केडी, सिंगम, वेदम, पंचाक्षरी, खलेजा, ठाकिता-ठाकिता, नागवल्ली, रागाडा, वानम, सागुनी, थाण्डवम, दामरुक, एलेक्स पांडियन, मिर्ची, इरंदम उलग्राम, लिंगा, येंनाई अरिंधाई, बाहुबली, रुध्रामादेवी, साइज ज़ीरो, सुगाडे चिन्नई नयना, ओपीरी, थोझा, ओम नमो वेंकटेश्वर आदि।
2017 में आई बाहुबली 2 जिसने उनकी फिल्मी कैरियर को नई उचाई प्रदान की। साउड इंडियन फिल्म पैसा वसुल व्यवसाय करती है, फिल्में आर्टिस्ट के नाम पर नहीं बल्कि भाषा और कल्चर को लेकर चलती है। कहानी की बात ही अलग है, वहां कास्ट, लोकेशन और संगीत पर ज्यादा काम होता है। फिल्म की सफलता को पहले ही डायेक्टर भांप लेता है और दर्शकों के टेस्ट को लेकर परिकल्पना की जाती है, इसीलिए कुछ फिल्मों को छोड़ दिया जाए तो साउथ का सिनेमा घाटे का नहीं है। उस दौर में अनुष्का को साथ लेकर जितने भी प्रोड्यूसर, डायरेक्टर ने काम किये सभी ने अच्छा बिसनेस किया। इसी का परिणाम है कि अनुष्का के फिल्मी कैरियर को ब्रेक नहीं लगा। उन्होंने हर क्षेत्र में बेहतर पर्फोंमेंस दिया है एक्टिंग, डांस, फाइट, रोमांस, कॉमेडी 100 प्रतिशत रहा। अपने अभिनय के दम पर अनुष्का शेट्टी कई ने अवॉर्ड अपने नाम किये साथ ही एक तेलगु फिल्म के लिये उन्हे फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। जीवन के कई उतार चड़ाव के दौर में खुद को साबित करने का गजब का आत्म विश्वास है अनुष्का के भीतर। भले ही फिल्म बाक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन न पाया हो किन्तु उनकी कला को हमेशा सम्मान मिला। सिंगम उनके दूसरे दौर की सफल फिल्म साबित हुई। बात अब बाहुबली द बिगिनिंग की बात की जाए तो वहां भी उन्हे ज्यादा कुछ करने का अवसर नहीं मिला। लेकिन जब बाहुबली 2 आई तो याकायक ही उनका कैरियर फिर बुलंदी की ओर दौड़ पड़ा।
बाहुबली-2 की देवसेना को लोग कभी नहीं भूला पायेंगे। स्वयं अनुष्का शेट्टी के लिये भी यह ऐतिहासिक फिल्म है। अनुष्का को इस रोल में देखकर ऐसा लगा है कि देवसेना की भूमिका के लिये इससे बेहतर कोई और हो नहीं सकती थी। पराक्रमी, साहसी और स्वाभिमानी राजकुमारी जैसा गुण लेकर पैदा हुई अनुष्का शेट्टी में खुबसूरती का ऐसा लावण्य है कि जिसे देखकर अप्सरा भी शर्मा जाये। जितनी उनकी सुंदरता की चर्चा है उनकी वीरता की भी है। तलवार और तीर चलाने का ऐसा अंदाज जिसे देख सहत्रबाहु भी हथियार डाल दे। बाहुबली-2 के दूसरे भाग को वास्तव में कहा जाय तो देवसेना के लिये ही बनी है। पहले भाग में ये बात चर्चा का विषय रहा की कटप्पा ने बाहुबली-2 को क्यो मारा। पर जब फिल्म आई तो वो बात हवा-हवाई हो गई। किसी का ध्यान उस ओर गया ही नहीं, कही-कही तो ऐसा लगा की हम यदि पहले भाग को पूरी तरीके से समझ लेते तो शायद कटप्पा ने बाहुबली-2 को क्यो मारा ये जान जाते। हो सकता है ये डारेक्टर की भूल हो कि वे पहली भाग में ही स्पष्ट नहीं कर पाये। जबकि दूसरे भाग को देखा जाये तो पूरी फिल्म केवल देवसेना और राजमाता शिवगामी यानी सास-बहु को दिखाने के लिये बनाई गई है। बाहुबली-2 में एक और सबसे बड़ी खासिय नजर आई वो है टीम वर्क, संयम और परिश्रम।

24.5.17

सचिन तेंदुलकर की बायोग्राफिकल मूवी Sachin: A Billion Dreams

'सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स'

क्रिकेट की दुनियां के भगवान कहे जाने वाले Sachin Tendulkar के जीवन पर आधारित फिल्म 'Sachin: A Billion Dreams' बन कर तैयार है। चूकि यह एक real life पर बनी फिल्म है तो सचिन तेंदुलकर जैसे बड़े किरदार को निभाने के लिये सचिन से कम तो हो नहीं सकता था। सचिन के बायोपिक मूवी में अन्य कलाकार अभिनय करते तो शायद कहीं न कहीं उनकी कमी जरूर खलती या उनके चाहने वाले दूसरे चेहरे को स्वीकार नहीं कर पाते। बहरहाल इस फिल्म में सचिन के किरदार में स्वयं सचिन तेंदुलकर ही नजर आयेंगे। यह फिल्म 26 मई को रिलीज होने वाली है। सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स को लोग देखने के लिए लोग काफी उत्साहित है खास कर खेल प्रेमी। दुनियां के वो तमाम देश जहां क्रिकेट का खेला जाता है, खिलाड़ियों के आइकॉन है सचिन। वो देखना चाहते है कि खेल के मैदान पर रनों की बौछार करने वाले एक महान शक्स कैसे पले-बड़े और कितना संघर्ष पूर्ण रहा है उनका कैरियर। चूकि लोग सचिन तेंदुलकर के बारे में बहुत कुछ पहले से ही जानते है, बचपन कैसा था, उनके गुरू कौन थे साथ ही उनके परिवार में कौन-कौन है, क्या करते है आदि सब खुली किताब की तरह है। और इतने वर्षों में उनके जीवन पर कई लेखकों ले कलम चलाये है, बहुत सी पुस्तके प्रकाशित हुई है। देश ही नहीं बलिक अंतरराष्टीय पत्र-पत्रिकाओं ने उन्हे मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिये है। कुल मिलके कहा जाये तो दुनिया भर के लोग सचिन को पढ़ते रहे है, तो अब सिर्फ देखने की लालसा रह गई थी जो पूरा होने जा रहा है।
सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स के निर्देशक और लेखक है जेम्स अर्सकिन, निर्माता रवि भगचंदका और कहानी महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बायोपिक है। इससे पहले भी कई नामचीन हस्तियों की जीवन को रेखांकित करती हुई फिल्में बनाई गई है, आगे भी बनेगी। इस फिल्म को आम फिल्मों की तरह से नहीं देखा जाना चाहिये कि रिलीज होते ही दर्शकों की भीड़, करोड़ों की रिकार्ड तोड़ कमाई, अवार्ड आदि। चूकि ये बायोपिक है और हम पहले भी चर्चा कर चूके है कि सचिन को हम सब पहले भी पढ़ते, देखते रहे है ऐसे में नये की उम्मीद तो नहीं की जा सकती है सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स से। हां इससे सचिन पर्दे पर डेब्यू करने जा रहे है जिसमें वे खुद के जीवन को फिर से पर्दे पर जीने की कोशिश करेंगे। कहानी खुद की है तो कुछ अनजाने-अनकहे तथ्यों से पर्दा हटेगा और कुछ कल्पनाओं का समावेश होगा। सचिन भी मूवीमेकर को फ्री हेंड देकर फिल्म को इंट्रेस्टींग बनाने की कोशिश कर रहे है। स्वयं भी गीत-संगीत और अभिनय के मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने के लिये जी तोड़ मेहनत किये है।
वे बहुत ही सौभाग्यशाली हुये है इस मामले में कि उनकों खुद के जीवन पर बनने वाली फिल्म में स्वयं के चरित्र को जीने का अवसर मिला है। पर्दे पर क्या कुछ नया देखने और जानने को मिलेगा यह फिल्म रिलीज के बाद ही बता लगेगा। सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स का ऑफिसियल ट्रेलर आ चुका है। कम शब्दों मे कहा जाए तो सचिन की इस फिल्म से आप सचिन को ही जानेंगे। फिल्म लगभग 1 घंटे 20 मिनट की हिन्दी भाषा में है जिसमें आप देखेंगे कि सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को हुआ था। क्रिकेट के इतिहास में उन्हें भगवान कहा जाता है, दुनियां भर में उनके करोड़ों फैंस है। सचिन को भारत के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया है। इसके अलावा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार व पद्म विभूषण से भी पुरस्कृत किये जा चुके है। वह राज्य सभा के भी सदस्य हैं, सन् 2012 में उन्हें राज्य सभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था। 
सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का हिस्सा रहते उन्होने कई रिकार्ड अपने नाम किये। उन्होंने टेस्ट व एक दिवसीय क्रिकेट, दोनों में सर्वाधिक शतक अर्जित किये हैं। वे टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं। इसके साथ ही टेस्ट क्रिकेट में 14000 से अधिक रन बनाने वाले वह दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपना पहला क्रिकेट मैच मुम्बई के लिये 14 वर्ष की उम्र में खेला था। उनके अन्तर्राष्ट्रीय खेल जीवन की शुरुआत 1989 से हुई। मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्मे सचिन का नाम उनके पिता रमेश तेंदुलकर ने अपने सबसे चहेते संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था। उनके बड़े भाई का नाम अजीत तेंदुलकर जिन्होने उसे क्रिकेट खेलने के लिये प्रोत्साहित किया था। सचिन के एक भाई का नाम नितिन तेंदुलकर और एक बहन सविता तेंदुलकर हैं। 1995 में सचिन तेंदुलकर का विवाह अंजली तेंदुलकर से हुआ। सचिन के दो बच्चे हैं सारा और अर्जुन। इस तरह सचिन के घर परिवार और खेल से जुड़ी कहानी को पर्दे पर कितना रिसपांस मिलता है यह तो दर्शक तय करेंगे। 
आगे की खबर यह भी है कि सचिन के बायोपिक के बाद और कई नामचीन हस्तियों की बायोपिक मूवी बनने जा रही है। फिलहाल सचिन तेंदुलकर की बायोपिक मूवी सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स की सफलता अन्य खिलाड़ियों, नेताओं की बायोपिक का लाइफलाइन तय करेगा। वैसे तो सचिन अपने इस मूवी को लेकर काफी संतुष्ट है, वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात कर फिल्म के बारे में जानकारी दे चूके है। सचिन खुद भी एक बड़े ब्रेंड है और प्रधानमंत्री से उनके मुलाकात का असर उनके फिल्म को मनोरंजन कर से मुक्त के रूप में दिख रहा है, कई राज्य तो सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स को टेक्स फ्री करने की औपचारिक घोषणा भी कर चूके है।0

- जयंत साहू
ग्राम-डूण्डा, पोस्ट सेजबहार,
जिला रायपुर छ.ग. 9826753304

11.4.17

Indian Premier League 2017 Cricket Match Points Table

खेल जगत में सर्वाधिक दिवानगी लोगों में Cricket की प्रति ही देखने को मिलता है। क्रिकेट के प्रति ये दिवानगी सिर्फ भारत में नहीं बल्कि हर वो देश जहां क्रिकेट खेला जाता है, सब में बराबर खुमारी है। खेलो की दुनिया में अब क्रिकेट अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर है, ऐसे में वर्ष भर मैच होना ता लाजमी है। world Cup, Lig match, Test match जैसे Tournament के बाद भारत में आईपीएल टी 20 का चलन शुरू हो चुका है। ये कहे कि अब तो Cricket का खेल एक अच्छा खासा व्यापार का रूप ले चुका है। खिलाड़ियों की बोली लगाई जाती है जिसने ज्यादा रकम दिये वो खिलाड़ी उसी के लिये खेलेगा। क्रिकेट टीम कंपनी अपने द्वारा खरीदे गये खिलाड़ियों को मैदान में उतारते है और उनेक माध्यमों से आय अर्जित करते है। इंडियन प्रीमयर लिग मैच के नाम से खेले जाने वाली इस प्रतियोगिता में कुल आठ टीमें भाग ले रही है सनराइजर्स हैदराबाद, कोलकाता नाइट राइडर्स, किंग्स इलेवन पंजाब, मुंबई इंडियंस, राइजिंग पुणे सुपरग्रेट, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, दिल्ली डेयरडेविल्स, गुजरात लायंस आदि।

दोस्तो आईपीएल टी 20 के इस वर्ष में कुल कितने मैच खेले जायेंगे। कौन-सा मैच कब और कहा होगा इसकी पूरी जानकारी हमारे ब्लॉग के पिछले पोस्ट Chahalkadami.blogspot.in में हम आपके दे चूके है। साथ ही आपको हमने उन ब्लॉग chahalkadami.blogspot.in में टीमों के बारे में विस्तार से लिखा थी कि कौन से टीम कौन-कौन खिलाड़ी खेलने वाले है और उनके कोच कौन है। बहरहाल मैच तो 5 अप्रेल से शुरू हो चुके है जो 21 मई तक चलेगा जिसमें कुल 60 मैच खेले जायेंगे। आईपीएल के आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार 56 लिग मैच होने है तथा तीन मैच 16,17 और 19 मई को क्वाटर फाइनल होगा। इस सीजन का फाइनल मैच 21 मई को शाम 8 बजे से हैदराबाद में खेला जायेगा।

आइये हम अब आपको इस पॉइंट टेबल के माध्यम से आईपीएल टीमों की मौजूदा स्कोर से अवगत कराते है।

Live Points Table



Team     Pld Won Lost Tied N/R Net RR             For Against               Pts
1 SRH 2 2 0 0          +2.100 347/35.3      307/40         4
2 KXIP 2 2 0 0 +1.598         314/33.3      311/40         4
3 KKR 2 1 1 0 +1.279         362/34.5      363/39.5                 2
4 MI 2 1 1 0         -0.025 364/39.5      365/39.5                 2
5 RPS 2 1 1 0         -0.136 350/39.5      348/39         2
6 RCB 3 1 2 0         -1.206 477/60      499/54.3                 2
7 DD 1 0 1 0         -0.750 142/20      157/20         0
8 GL 2 0 2 0        -2.731 318/40     324/30.2                 0


10.4.17

IPL T20 participating team and players


Sunrisers Hyderabad - 
Kolkata Knight Riders -
Kings XI Punjab-
Mumbai Indians- 
Rising Pune Supergiant- 
Royal Challengers Bangalore-
Delhi Daredevils- 
Gujarat Lions- 


Delhi Daredevils

PLAYERS

1. MOHAMMED SHAMI
2. SHAHBAZ NADEEM
3. JAYANT YADAV
4. AMIT MISHRA
5. ZAHEER KHAN
6. SHREYAS IYER
7. CARLOS BRATHWAITE
8. CHAMA MILIND
9. CHRIS MORRIS
10. KARUN NAIR
11. PRATYUSH SINGH
12. RISHABH PANT
13. SAM BILLINGS
14. SANJU SAMSON
15. SYED KHALEEL AHMED
16. ADITYA TARE
17. COREY ANDRESON
18. ANGELO MATHEWS
19. KAGISO RABADA
20. M ASHWIN
21. PAT CUMMINS
22. NAVDEEP SAINI
23. ANKEET BAWNE
24. SHASHANK SINGH
25. BEN HILFENHAUS

COACHES & STAFF

1. RAHUL DRAVID (CHIEF MENTOR)
2. PADDY UPTON (HEAD COACH)
3. PRAVIN AMRE (ASSISTANT COACH)
4. TA SEKAR (DIRECTOR - GMR SPORTS)
5. SUNIL VALSON (TEAM MANAGER)
6. VAIBHAV DAGA (ASSISTANT PHYSIO)
7. RAJNIKANTH S (TEAM TRAINER)
8. PAUL CLOSE (HEAD PHYSIOTHERAPIST)
9. V ARVIND (ASSISTANT COACH)
10. ZUBIN BHARUCHA (DIRECTOR TECHNICAL)
11. RAJEEV KUMAR (TEAM MASSEURE)
12. PANISH SHETTY (TEAM ANALYST)

Gujarat Lions

PLAYERS

1. SURESH RAINA
2. BRENDON McCULLUM
3. RAVINDRA JADEJA
4. DWAYNE BRAVO
5. AARON FINCH
6. JAMES FAULKNER
7. DWAYNE SMITH
8. DINESH KARTHIK
9. ANDREW TYE

7.4.17

IPL 2017

IPL 2017 SEASON SCHEDULE



60 matches to be played in IPL

 

Wed 05-April 8pm 
1 Sunrisers Hyderabad Royal Challengers Bangalore Hyderabad
Thu 06-April 8pm 
2 Rising Pune Supergiant Mumbai Indians Pune
Fri 07-April 8pm 
3 Gujarat Lions Kolkata Knight Riders Rajkot
Sat 08-April 
4pm 
4 Kings XI Punjab Rising Pune Supergiant Indore
8pm 
5 Royal Challengers Bangalore Delhi Daredevils Bengaluru
Sun 09-April
4pm 
6 Sunrisers Hyderabad Gujarat Lions Hyderabad
8pm 
7 Mumbai Indians Kolkata Knight Riders Mumbai
Mon 10-April 8pm 
8 Kings XI Punjab Royal Challengers Bangalore Indore
Tue 11-April 8pm 
9 Rising Pune Supergiant Delhi Daredevils Pune
Wed 12-April 8pm 
10 Mumbai Indians Sunrisers Hyderabad Mumbai
Thu 13-April 8pm 
11 Kolkata Knight Riders Kings XI Punjab Kolkata

Fri 14-April
4pm 
12 Royal Challengers Bangalore Mumbai Indians Bengaluru
8pm 
13 Gujarat Lions Rising Pune Supergiant Rajkot
Sat 15-April
4pm 
14 Kolkata Knight Riders Sunrisers Hyderabad Kolkata
8pm 
15 Delhi Daredevils Kings XI Punjab Delhi
Sun 16-April
4pm 
16 Mumbai Indians Gujarat Lions Mumbai
8pm 
17 Royal Challengers Bangalore Rising Pune Supergiant Bengaluru
Mon 17-April
4pm 
18 Delhi Daredevils Kolkata Knight Riders Delhi
8pm 
19 Sunrisers Hyderabad Kings XI Punjab Hyderabad
Tue 18-April 8pm 
20 Gujarat Lions Royal Challengers Bangalore Rajkot
Wed 19-April 8pm 
21 Sunrisers Hyderabad Delhi Daredevils Hyderabad
Thu 20-April 8pm 
22 Kings XI Punjab Mumbai Indians Indore
Fri 21-April 8pm 
23 Kolkata Knight Riders Gujarat Lions Kolkata
Sat 22-April
4pm 
24 Rising Pune Supergiant Sunrisers Hyderabad Pune
8pm 
25 Mumbai Indians Delhi Daredevils Mumbai
Sun 23-April
4pm 
26 Gujarat Lions Kings XI Punjab Rajkot
8pm 
27 Kolkata Knight Riders Royal Challengers Bangalore Kolkata
Mon 24-April 8pm 
28 Mumbai Indians Rising Pune Supergiant Mumbai
Tue 25-April 8pm 
29 Royal Challengers Bangalore Sunrisers Hyderabad Bengaluru
Wed 26-April 8pm 
30 Rising Pune Supergiant Kolkata Knight Riders Pune
Thu 27-April 8pm 
31 Royal Challengers Bangalore Gujarat Lions Bengaluru
Fri 28-April
4pm 
32 Kolkata Knight Riders Delhi Daredevils Kolkata
8pm 
33 Kings XI Punjab Sunrisers Hyderabad Mohali
Sat 29-April
4pm 
34 Rising Pune Supergiant Royal Challengers Bangalore Pune
8pm 
35 Gujarat Lions Mumbai Indians Rajkot
Sun 30-April
4pm 
36 Kings XI Punjab Delhi Daredevils Mohali
8pm 
37 Sunrisers Hyderabad Kolkata Knight Riders Hyderabad
Mon 01-May
4pm 
38 Mumbai Indians Royal Challengers Bangalore Mumbai
8pm 
39 Rising Pune Supergiant Gujarat Lions Pune
Tue 02-May 8pm
 40 Delhi Daredevils Sunrisers Hyderabad Delhi
Wed 03-May 8pm 
41 Kolkata Knight Riders Rising Pune Supergiant Kolkata
Thu 04-May 8pm 
42 Delhi Daredevils Gujarat Lions Delhi
Fri 05-May 8pm 
43 Royal Challengers Bangalore Kings XI Punjab Bengaluru
Sat 06-May
4pm 
44 Sunrisers Hyderabad Rising Pune Supergiant Hyderabad
8pm 
45 Delhi Daredevils Mumbai Indians Delhi
Sun 07-May
4pm 
46 Royal Challengers Bangalore Kolkata Knight Riders Bengaluru
8pm
47 Kings XI Punjab Gujarat Lions Mohali
Mon 08-May 8pm 
48 Sunrisers Hyderabad Mumbai Indians Hyderabad
Tue 09-May 8pm 
49 Kings XI Punjab Kolkata Knight Riders Mohali
Wed 10-May 8pm 
50 Gujarat Lions Delhi Daredevils Kanpur
Thu 11-May 8pm 
51 Mumbai Indians Kings XI Punjab Mumbai
Fri 12-May 8pm 
52 Delhi Daredevils Rising Pune Supergiant Delhi
Sat 13-May
4pm 
53 Gujarat Lions Sunrisers Hyderabad Kanpur
8pm 
54 Kolkata Knight Riders Mumbai Indians Kolkata
Sun 14-May
4pm 
55 Rising Pune Supergiant Kings XI Punjab Pune
8pm 
56 Delhi Daredevils Royal Challengers Bangalore Delhi
PLAYOFFS
Tue 16-May 8pm Qualifier 1 First placed team Second placed team TBC
Wed 17-May 8pm Eliminator Third placed team Fourth placed team TBC
Fri 19-May 8pm Qualifier 2 Loser of Qualifier 1 Winner of Eliminator TBC
FINAL
Sun 21-May 8pm Final Winner of Qualifier 1 Winner of Qualifier 2 Hyderabad
Photos from Google


3.4.17

'न्याय का तीर्थ' इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्षगांठ

देश में न्याय व्यवस्था को अंतिम आदमी तक पहुंचाने के लिये सजग रूप से खड़ा कानून का मंदिर 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' अब अपनी स्थापना की 150 वीं वर्षगांठ मना रहा है। ज्ञात हो कि Allahabad High Court को मूल रूप से ब्रिटिश शासन के कार्यकाल में Indian high court act 1861 के अन्तर्गत आगरा में 17 मार्च 1866 को स्थापित किया गया था। सन् 1869 में इसे आगरा से इलाहाबाद स्थानान्तरित किया गया और 11 मार्च 1919 से इसे 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' नाम दिया गया। 25 फरवरी 1948 को, Uttar Pradesh Assembly ने एक प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल द्वारा गवर्नर जनरल को यह अनुरोध किया गया कि अवध चीफ कोर्ट लखनऊ और इलाहाबाद हाई कोर्ट को मिलाकर एक कर दिया जाये। इसका परिणाम यह हुआ कि लखनऊ और इलाहाबाद के दोनों (प्रमुख व उच्च) न्यायालयों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय नाम से जाना जाने लगा तथा इसका सारा कामकाज इलाहाबाद से चलने लगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले समारोह के अवसर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुये भारत के Prime Minister Mr. Narendra Modi ने कहा कि कानून का लक्ष्य अन्तिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था ऐसी हो कि सबको न्याय आसानी से सुलभ हो। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक तर्कसंगत बनाने के साथ-साथ वादों के त्वरित निस्तारण पर भी बल दिया। श्री मोदी ने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी नये भारत का संकल्प लें और हर क्षेत्र में नयी उमंग व ऊर्जा  से नव निर्माण में लग जाएं। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को साकार करते हुए सभी देशवासी देश को एक नयी पहचान देने में मदद करें। उन्होंने Jurists, advocates सहित समाज के हर वर्ग के लोगों से अपील की कि वे नव भारत के निर्माण के साथ विजन-2022 के संकल्प को पूरा करने में लग जाएं, ताकि देश प्रगति की नयी ऊँचाइयों को हासिल करते हुए एक महाशक्ति के रूप में विकसित हो सके। 
Allahabad High Court  के गौरवशाली अतीत का विस्तार से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के दौरान यहां के न्यायविदों और अधिवक्ताओं ने जिस भूमिका का निर्वहन करते हुए हमें आजादी दिलायी और आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र को जो मजबूती दी, उससे पूरा देश गौरवान्वित है। केन्द्र सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने का जिक्र करते हुए Prime minister ने कहा कि देश में लागू छोटे-बड़े लगभग 1200 कानूनों का अध्ययन कर उनका सरलीकरण किया गया है। न्याय के क्षेत्र में Modern technology की पुरजोर वकालत करते हुए Prime minister ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की सराहना की कि उन्होंने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। उन्होंने Central government की ओर से हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को न्याय का तीर्थ बताते हुए कहा कि यहां के न्यायविदों ने भारतीय लोकतंत्र को अथाह ऊर्जा दी है। 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक वर्ष के समारोहों की सफलता पर Prime minister ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायमूर्तियों व अधिवक्तागणों की सक्रियता की मुक्तकंठ से सराहना की। 
इस अवसर पर भारत के Chief Justice Mr. J. s. Khehar ने अपने उद्बोधन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस उच्च न्यायालय ने भारत को 5 मुख्य न्यायाधीश दिए हैं। Prime minister के नव भारत के संकल्प के साथ मन की बात की चर्चा करते हुए Chief Justice ने न्यायालयों में बड़ी संख्या में लम्बित वादों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि Supreme Court से लेकर High Courts और Subordinate courts के न्यायमूर्तिगण कम से कम 5-10 दिन का समय निकालते हुए लम्बित मामलों को सूचीबद्ध कर निस्तारण की कार्य योजना बना लें, तो निश्चित रूप से अकेले सर्वाेच्च न्यायालय के 80-85 जज अपनी इस छोटी से सैक्रिफाइस से लम्बित वादों के बोझ को कम कर सकते हैं। इस अवसर पर न्यायिक इतिहास में Allahabad High Court की स्थापना के-1866 से 100 वर्ष यानि 1966 के अवसर पर प्रकाशित पुस्तक का मुख्य न्यायाधीश ने विमोचन किया।

समारोह को उत्तर प्रदेश के नव निर्वाचित Chief Minister Shri Yogi Adityanath ने भी संबोधित किये। योगी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर जब-जब संकट आया है, तब-तब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उच्च मानदण्डों की स्थापना करने के साथ लोकतंत्र की रक्षा की है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देश में न्याय का बड़ा मंदिर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों, शोषितों, वंचितों और महिलाओं को सर्वसुलभ न्याय दिलाने में इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित अधीनस्थ न्यायालयों की बहुत बड़ी भूमिका है। न्यायालयों में उच्च तकनीकी और अवस्थापना सुविधाओं को उपलब्ध कराने में प्रदेश सरकार हर सम्भव मदद करेगी। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि 14 वें वित्त आयोग ने न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समस्त राज्यों के लिए कुल 9748 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की अनुसंशा की है। इस राशि में से 915 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश के लिए इंगित हैं, जिसमें से 488 करोड़ रुपए केवल Fast track court जघन्य अपराध, वरिष्ठ नागरिक, महिला, बच्चों एवं दिव्यांगों के लिए रखे गए हैं। 
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150 वीं वर्षगाठ के अवसर पर सर्वाेच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री दीपक कुमार मिश्रा, केन्द्रीय कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, मुख्य न्यायाधीश श्री दिलीप बाबा साहेब भोसले, उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश के विधि एवं न्याय मंत्री श्री बृजेश पाठक, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के अध्यक्ष श्री अनिल तिवारी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री बी.के. शुक्ला, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी, न्यायमूर्ति श्री तरुण अग्रवाल, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, अन्य उच्च न्यायालयों के वर्तमान एवं भूतपूर्व न्यायमूर्तिगणों सहित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्तागण उपस्थित थे।
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पत्र सूचना शाखा उ.प्र., पत्र सूचना कार्यालय-भारत सरकार।

1.4.17

Padma Awards 2017

Padma Awards - one of the highest civilian Awards of the country, are conferred in three categories, namely, Padma Vibhushan, Padma Bhushan and Padma Shri. The Awards are given in various disciplines/ fields of activities, viz.- art, social work, public affairs, science and engineering, trade and industry, medicine, literature and education, sports, civil service, etc. ‘Padma Vibhushan’ is awarded for exceptional and distinguished service; ‘Padma Bhushan’ for distinguished service of high order and ‘Padma Shri’ for distinguished service in any field. The awards are announced on the occasion of Republic Day every year. 
These awards are conferred by the President of India at ceremonial functions which are held at Rashtrapati Bhawan usually around March/ April every year. This year the President of India has approved conferment of Padma Awards to 89 persons as per the list below. The list comprises of 7 Padma Vibhushan, 7 Padma Bhushan and 75 Padma Shri Awardees. 19 of the awardees are women and the list also includes 5 persons from the category of foreigners, NRIs, PIOs and 6 Posthumous awardees.




यह पुरस्कार भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह प्रदान किये गये।












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