23.10.16

पुलिस प्रशासन बनाम आदिवासी अथवा नक्सली!

एक नजर दो खबर...जयंत साहू 

छत्तीसगढ़ के चुनिंदा समाचार पत्रों के कतरन-






बस्तर अंचल अब और भी ज्यादा सुर्खियों में रहने लगा है, कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त आदिवासियों की दरिंदगी तो कभी नकली मुठभेड़ में मारे जाते बेगुनाह आदिवासी। खास कर जब से बस्तर रेंज की कमान आर.पी. कल्लूरी के हाथ लगी है बस्तर की वसुंधरा से खून की गंध आने लगी है। शहादत तक लड़ने वाले वीर सैनिक और उनके बंदूक से मरते माओवादी, और दोनों के मौत के बाद लाश पर मातम। शायद यही मातम बदले की भावना को जन्म देती है और फिर दोबारा वहीं घटना दोहराएं जाते है। जांबाज आईजी की हुंकार से बौराये जवानों के बंदूकों को हर आदिवासी चेहरा माओवादी नजर आता है। और आदिवासियों की बात करने वालों को नक्सली समर्थक करार दे दिया जाता है। शायद बस्तर में आईजी के कानून के खौफ नक्सलवादियों से कही ज्यादा है तभी तो आदिवासियों के मुॅह से निकली चीख हलक तक ही गुंज के रह जाती है। प्रबुद्धजन, समाजसेवी और जन नायक यदि मुद्दों को उठाते है तो उन पर पार्टी और विचारधारा भिनभिनाने लगते है। 
बस्तर में शांति का वातावरण बनाने के लिए शासन, प्रशासन प्रयासरत है किन्तु बंदूक के नोक पर। हिंसा से कही ज्यादा विकासकारी योजना, प्रोत्साहन और आत्मियता से माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। उनके आत्मसमर्पण और समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद प्रशासन का वर्तमान बर्बरता पूर्वक व्यवहार उनके मन को खिन्न कर रहा होगा। जिस तरह हर पाक मुसलमान को आतंकी होने के शक्की नजरों से देखा जाता है वैसे ही आदिवासियों को माओवादी या नक्सली के रूप में। इसका एक उदाहरण ताड़मेटला आगजनी कांड है जिसे मार्च 2011 में अंजाम दिया गया था। जिसमें ताड़मेटला, तिम्मापुर और मोरपल्ली गांव में वनवासियों के करीब पौने तीन सौ मकानों में आग लगा दी गई थी। आगजनी की घटना के लिए अधिकांश पीड़ित वनवासियों ने आयोग को दिए अपने बयान में पुलिस और एसपीओ तथा सलवा जुडूम से जुड़े लोगों को आरोपी बताया है वहीं पुलिस व सलवा जुडूम से जुड़े लोगों का कहना है कि आगजनी को नक्सलियों ने अंजाम दिया था। विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई घटना की जांच कर रही है और राज्य शासन की ओर से विशेष न्यायिक जांच आयोग घटना की जांच कर रहा है।
हाल ही में सामने आये ताड़मेटला आगजनी कांड की जांच कर रहे विशेष न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस टीपी शर्मा की बातों ने यह और स्पष्ट कर दिया की बस्तर में किस तरह का माहौल चल है। घटना की न्यायिक जांच के लिए आयोजित सुनवाई के सिलसिले में जगदलपुर पहुंचे जस्टिस शर्मा ने मीडिया से संक्षिप्त चर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि आयोग के लिए एक-एक पीड़ित का बयान महत्वपूर्ण है ताकि घटना की असलियत सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने ठोस नीति तैयार की जा सके। आयोग के अध्यक्ष के नाते मेरा धर्म यही है कि पीड़ितों की बात सुनी जाय क्योंकि घटना का दंश जिन्होंने झेला है उनकी बात सुना जाना नैसर्गिक न्याय के अंतर्गत आता है। आयोग की ओर से उन्होंने शासन-प्रशासन के साथ-साथ हर उन लोगों से पीड़ितों को बयान के लिए सामने लानें में मदद करने का अनुरोध किया है। बार-बार समन भेजने के बाद भी पीड़ित बयान देने सामने नहीं आ रहे हैं। बावजूद इसके आयोग ने दोरनापाल, सुकमा तक पहुंचकर गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और जरूरत पड़ी तो दुबारा भी वहां जाने से पीछे नहीं हटेंगे। ताड़मेटला आगजनी कांड के मीडिया में आने के बाद से समाजसेवी व राजनीतिज्ञों की ओर से तिखी बयाने आ रहे है। 'प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि सीबीआई जांच और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार के पास तुरंत कार्रवाई करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रहा है। अदालत का आदेश कांग्रेस के उन आरोपों की पुष्टि करता है कि बस्तर में पुलिस आईजी कल्लूरी के नेतृत्व में आदिवासियों की हत्या की जा रही है और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। ताड़मेटला कांड को कल्लूरी के आदेश पर अंजाम दिया गया था, उस समय कल्लूरी ही दंतेवाड़ा के एसएसपी थे। उनके ही निर्देश पर आदिवासी महिलाओं को प्रताड़ित किया गया और उनके घर जलाए गए। आईजी एसआरपी कल्लूरी सहित सभी दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और गिरफ्तार कर सभी को अविलंब जेल भेजा जाए।'
इस तरह की घटनाओं से आदिवासी भी असमंजस्य की स्थिति में है कि आखिर अब किस पर भरोसा करें। पुलिस अथवा माओवादी दोनों ही आदिवासियों के हितों की रक्षा का वचन देकर पीठ में खंजर चुभोने वाली वारदातों को अंजाम देते है। प्रशासन आम आदमी का विश्वास जीतने में असफल है और शासन अपने अफसरों में लगाम लगाने में। बहरहाल सामंजस्य पैदा करने की कोशिश जरूर होती है किन्तु आगज से अंजाम कुछ और ही होता है। पिछले दिनों पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीदों के बलिदान को हम व्यर्थ नहीं जाने देंगे, शहीदों के सपनों को हम एकजुट होकर पूरा करेंगे। छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या का जल्द समाधान होगा और यहां शांति और विकास होगा। पुलिस की नौकरी केवल आजीविका का साधन नहीं है। पुलिस और सशस्त्र बलों में हमारे जवान 'माटी का कर्ज चुकाने' के पावन जज्बे के साथ आते हैं। नक्सलवाद और आतंकवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, दोनों ही देश को कमजोर करना चाहते हैं। हमारे जवान सशस्त्र बलों के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नक्सल चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर रहे हैं। गृहमंत्री ने इस अवसर कहा कि पुलिस बल और सशस्त्र बल के जवानों ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपना बलिदान दिया। उनके संघर्षों और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से बस्तर और राजनांदगांव जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस समस्या पर काबू पाने में मदद मिल रही है और हम नक्सल समस्या के समाधान के लिए तत्पर हैं। पुलिस बल और सशस्त्र बल के जवानों में नई उर्जा पैदा करने वाले ये उद्बोधन पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर देश के अमर शहीदों को याद करते हुए दिये गये थे। देशवासियों के साथ-साथ बस्तरिहा जन भी अमर शहीदों को नमन करते है, देश के लिए मर मिटने का जस्बा रखते है किन्तु जो कुछ पुलिस और सशस्त्र बल द्वारा आम आदिवासियों के साथ किया गया है उनसे आहत भी है। अब देश और कानून की बात करने वालों से उम्मीद तो यही की जा रही है कि वे ताड़मेटला कांड में सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद ठोस कार्रवाई करेंगे क्योंकि कानून से उपर कोई भी नहीं। 
जयंत साहू
डूण्डा वार्ड-52, रायपुर छ.ग.
492015

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रोजगार के अवसर— थल सेना

थल सेना भर्ती रैली 6 दिसम्बर से दुर्ग में प्रांरभ : ऑनलाइन आवेदन 21 नवम्बर तक

छत्तीसगढ़।थल सेना भर्ती रैली 6 दिसम्बर से दुर्ग में प्रांरभ किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में ऑनलाईन www.joinindianarmy.nic.in पर ऑनलाईन पंजीकरण और आवेदन करना आवश्यक है। इस भर्ती रैली के लिए ऑनलाईन आवेदन 21 नवम्बर तक किया जा सकता है। इस भर्ती रैली का आवेदन करके 22 नवम्बर 2016 के बाद इसी वेबसाइट पर अपनी ई-मेल पर लॉगइन करके अपने प्रवेश पत्र का तारीख और रैली के विवरण के संबंध में प्रिंट आउट प्राप्त किया जा सकता है। उम्मीवाद अपने प्रवेश पत्र पर नवीनतम फोटो चिपकाने के बाद भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकते है। थल सेना भर्ती में सैनिक सामान्य डयूटी जी.डी पद हेतु उम्मीदवारों को कक्षा 10वी में 45 प्रतिषत अंक के साथ उत्तीर्ण तथा प्रत्येक विषय में कम से कम से 33 प्रतिषत अंको के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए। यदि आवेदक ने कक्षा 12वी पास की हो तो कक्षा 10वी में उत्तीर्ण अंक ही पर्याप्त होगें। इसी तरह सैनिक लिपिक कलर्क (स्टोर कीपर) पद हेतु अभ्यर्थियों को कक्षा 12 वी सा समकक्ष (कला, वाणिज्य या विज्ञान विषयों में कम से कम से 50 प्रतिषत अंक और प्रत्येक विषय में कम से कम 40 प्रतिषत अंको के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए। यदि प्रार्थी स्नातक में अंग्रेजी और गणित से उत्तीर्ण हो तो कक्षा 10वी और 12वी में प्रत्येक विषय में 40 प्रतिषत अंक आवष्यक नही होगी। सैनिक तकनीक पद हेतु अभ्यर्थियों को कक्षा 12वी (50 प्रतिषत अंको के साथ उत्तीर्ण तथा प्रत्येक विषय में कम से कर्म 40 प्रतिषत अंक के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए। सैनिक नर्सिग, सहायक सैनिक नर्सिग और सहायक वेटनरी के पद हेतु अभ्यर्थियों को कक्षा  12 या समकक्ष पास (अंग्रेजी, भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, विषयों में कम से कम 50 प्रतिषत अंक और प्रत्येक विषय कम से कम 40 प्रतिषत अंको के साथ उत्तीर्ण की हो और यदि बोटनी, जूलोजी, बायो, साइंस एवं अंग्रेजी विषय के साथ बी.एस.सी उत्तीर्ण की हो तो 12वी या समकक्ष में प्रतिषत लागू नही होगी। इसी तरह सैनिक ट्रेड मैन की पद हेतु 8वी उत्तीण अथवा 10वी उत्तीर्ण और उच्च षिक्षा पास अभ्यर्थी आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते है।अधिक जानकारी के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के दूरभाष नम्बर 0771-2573112  या मुख्यालय भर्ती कार्यालय के दूरभाष नम्बर 0761-2600242 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

रोजगार के अवसर— पटवारी

राज्य में होगी 1085 पटवारियों की भर्ती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों के 1085 पदों और राजस्व निरीक्षक के 90 पद पर भर्ती करने की वित्त विभाग से अनुमोदन मिलने के बाद  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय (महानदी भवन) से आयुक्त भू-अभिलेख को भर्ती करने की स्वीकृति जारी कर दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में पटवारियों एक हजार 405 और राजस्व निरीक्षक के 287 पद है। राजस्व मंत्री ने बताया कि पटवारियों की भर्ती  प्रदेश के जिन जिलों में की उनकी संख्या जिलेवार निम्नानुसार हैः- रायपुर में 45, बलौदाबाजार-भाटापारा, में 60, गरियाबंद, में 20, धमतरी में 35, महासमंद में 39, दुर्ग में 32, बेमेतरा में 25, बालोद में 50, राजनांदगांव में 126, कबीरधाम में 47, बस्तर में 25, कोंडागांव में 30, उत्तर बस्तर कांकेर में 30, नारायणपुर में 34, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में 20, सुकमा में 35, बीजापुर में 10, बिलासपुर में 57, मुंगेली में, 30, कोरबा में 47, सरगुजा में 32, सूरजपुर में 30, कोरिया में 50, रायगढ़ में 50, जशपुर में 25 और जांजगीर-चांपा में 86 पदों पर भर्ती की जाएगी ।

राज्योत्सव 2016 का किया शुभारंभ

विमानतल पर प्रधानमंत्री का आत्मीय स्वागत : डेढ़ साल में तीसरी बार छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुंचे श्री नरेन्द्र मोदी

रायपुर। सिर्फ डेढ़ साल में तीसरी बार छत्तीसगढ़ के दौरे पर राजधानी रायपुर पहुंचे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आज सवेरे स्वामी विवेकानंद विमानतल (माना) में गर्मजोशी के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। श्री मोदी भारतीय वायुसेना के विमान से यहां पहुंचे। विमानतल पर राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनकी अगवानी की। प्रदेश सरकार के मंत्रियों, राज्य के अनेक सांसदों, विधायकों, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रधानमंत्री का स्वागत किया। विमानतल पर कुछ देर रूकने के बाद प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। वे सबसे पहले जंगल सफारी पहुंचे, जहां उन्होंने राज्य सरकार के वन विभाग द्वारा 320 हेक्टेयर में 200 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित विशाल सफारी का लोकार्पण किया। उन्होंने इस कार्यक्रम के बाद नया रायपुर में ही सार्वजनिक परिवहन सेवा के तहत बस रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीटीआरएस) का शुभारंभ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री इस मौके पर एकात्म पथ का भी लोकार्पण किया। वे इन कार्यक्रमों के बाद दोपहर राज्योत्सव स्थल (पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग व्यापार परिसर) पहुंचे और वहां आयोजित विकास प्रदर्शनी में ‘हमर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पंच-सरपंचों से मुलाकात की। श्री मोदी ने प्रदर्शनी स्थल पर मेक इन इंडिया तथा ‘शिल्प ग्राम’ के मंडपों में भी जाएंगे और प्रदेश में हस्तशिल्प के विकास तथा उद्योगों के विकास के लिए हो रहे कार्योें का अवलोकन किया। प्रदर्शनी स्थल से श्री मोदी मुख्यमंच पर आएंगे और पांच दिवसीय राज्योत्सव 2016 का शुभारंभ करते हुए एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। माना विमानतल पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, केंद्रीय इस्पात एवं खान राज्य मंत्री श्री विष्णु देव साय, प्रदेश सरकार के गृह मंत्री श्री रामसेवक पैकरा, कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल , वाणिज्य और उद्योग तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अमर अग्रवाल लोक निर्माण, आवास और पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत, पंचायत और ग्रामीण विकास तथा स्वास्थ्य मंत्री श्री अजय चंद्राकर, राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेम प्रकाश पाण्डे, पर्यटन, संस्कृति और सहकारिता  मंत्री श्री दयाल दास बधेल, समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमति रमशीला साहू, श्रम, खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री भईया लाल राजवाड़े , खाद्य, नागरिक आपूर्ति और ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नू लाल मोहले, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, रायपुर के लोक सभा सांसद श्री रमेश बैस, जांजगीर की लोकसभा सांसद श्रीमति कमला देवी पटले, सरगुजा के लोकसभा सांसद श्री कमल भान सिंह, कांकेर के लोकसभा सांसद श्री विक्रम उसेंडी, बस्तर लोकसभा सांसद श्री दिनेश कश्यप, महासमुन्द के लोकसभा सांसद श्री चंदू लाल साहू, राजनांदगांव लोकसभा सांसद श्री अभिषेक सिंह, राज्य सभा सांसद डॉ. भूषण लाल जांगडे और श्री रणविजय सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री का स्वागत किया। राज्य शासन के मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड और पुलिस महानिदेशक श्री ए.एन. उपाध्याय ने भी पुष्पगुच्छ भेंटकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ का तीसरा दौरा

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री के रूप में श्री मोदी की डेढ़ साल में आज यह तीसरी छत्तीसगढ़ यात्रा है। वे पहली बार 9 मई 2015 को राज्य के प्रथम प्रवास पर दंतेवाड़ा आए थे, जहां उनकी उपस्थिति में बस्तर के औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार और केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के बीच लगभग 24 हजार करोड़ रूपए के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनमें रावघाट से जगदलपुर तक 135 किलोमीटर रेल मार्ग परियोजना भी शामिल हैं। श्री मोदी दूसरी बार 21 फरवरी 2016 को नया रायपुर और राजनांदगांव जिले के ग्राम कुर्रूभाट (विकासखंड डोंगरगढ़) आए थे। उन्होंने नया रायपुर में देश के करोड़ों आवास विहीन परिवारों  के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का शुभारंभ किया था। श्री मोदी ने डोंगरगढ़ प्रवास के दौरान ग्राम कुर्रूभाट की आमसभा में गांवों को शहरों जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए रूर्बन मिशन का भी शुभारंभ किया था। वहीं पर उन्होंने राजनांदगांव जिले के दो विकासखंडों -अम्बागढ़ चौकी और छुरिया को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) भी घोषित किया था और स्वच्छ भारत मिशन में सराहनीय योगदान के लिए धमतरी जिले की 104 वर्षीय श्रीमती कुंवर बाई को विशेष रूप से सम्मानित किया था। 

19.10.16

दिखेगा हिन्दुस्तान, देखेगी सारा दुनियां

'राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव-2016'

विविधता में एकता की मिसाल भारत बहुआयामी सांस्कृतिक धरोहरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), जनपथ, नई दिल्ली में 10 दिवसीय विविध सांस्कतिक उत्सव 'राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव-20160' का आयोजन किया। शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा, नगालैंड के राज्यपाल श्री पद्मनाभा आचार्य साथ ही संस्कृति मंत्रालय में सचिव श्री एन. के. सिन्हा, संयुक्त सचिव श्री एम. एल. श्रीवास्तव सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूदगी में लगभग 400 कलाकारों ने लोक और जनजातीय सहित विभिन्न नृत्यकलाओं का प्रदर्शन किया।  
इस अवसर पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा लाई 'मांडू' पर एक कॉफी टेबिल बुक और 'बर्बरता' पर एक डीवीडी का विमोचन भी किया गया। उत्सव के दौरान देश के विभिन्न शहरों और कस्बों जनजातीय और लोक विविधता के साथ ही नृत्य, संगीत, नाटक, मनोरंजन और व्यंजनों की विविधता का प्रदर्शन किया जाता है। 24 एकड़ में फैले आईजीएनसीए कैंपस में 35 फूड स्टाल लखनऊ की 'मक्खन मलाई', नगालैंड की 'बैंबू शूट', हरियाणा की जलेबा और कई अन्य व्यंजनों का प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा लोक, सामयिक, काल्पनिक कार्यों आदि का प्रदर्शन किया जाता है। इस अवसर पर आईसीसीआर, विदेश मंत्रालय द्वारा प्रायोजित थाईलैंड से आए एक समूह द्वारा रावण द्वारा सीता के अपहरण का मंचन किया जा रहा है, जिस दृश्य में दर्शकों के सामने गोदावरी नदी के तट पर रामायण का मंचन किया गया। इस उत्सव में फोटो प्रदर्शनी के साथ ही हस्तकौशल और कला के विभिन्न रूपों के माध्यम से भारत की संपन्न धरोहर का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही यहां आए मेहमानों हस्तकलाओं, व्यंजनों, रंगोली चित्रकारी, मूर्तिकला, फोटोग्राफी और पोंग चोलम नृत्य (मणिपुर) और युद्ध नृत्य (नगालैंड) जैसे लोक नृत्यों का एक ही जगह पर प्रदर्शन किया गया।

श्री राजनाथ सिंह - 'हमारे देश में विविधता में ही एकता है और यही संस्कृति हम सभी को आपस में जोड़े रखती है। उन्होंने इस तरह के विशेष कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी प्रतिभा, कलाकृतियों और व्यंजनों को एक ही मंच पर प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। संस्कृति मंत्रालय हमारी संपन्न सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और देश को एकजुट बनाने में अहम भूमिका निभाता है।'

डॉ. महेश शर्मा- 'हम आपको सांस्कृतिक उत्सव राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव 2016 में देखकर काफी खुश हैं, जिससे भारत की विरासत मजबूत होकर सामने आती है। यह कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों की कला, शिल्पकारों, नृतकों, हस्तकलाओं, विशिष्ट व्यंजनों और संगीत को एक साथ लाया है, जिससे यह भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा कार्यक्रम बन गया है। जहां इस कार्यक्रम से देश में रहने वाले हमारी संपन्न संस्कृति के कई संप्रदायों के युवा एक-दूसरे से जुड़ गए हैं, वहीं इसने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी प्रतिभा, कलाकृतियों और व्यंजनों को प्रदर्शित करने का मौका मिला है।'

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