19.9.16

योर आनर कानूनी जागरूकता को मिट्टी पलीद कर दिया पुलिसवालों ने

जयंत साहू का पाक्षिक कालम...एक नजर दो खबर

योर आनर कानूनी जागरूकता को मिट्टी पलीद कर दिया पुलिसवालों ने


* राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शॉर्ट फिल्म समारोह का आयोजन 17-18 सितंबर को राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज सभागार में किया गया था। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था लोगों को कानून के बारे में जानकारी शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से देना। आमतौर पर बहुत से अपराध कानून की जानकारी नहीं होने अथवा लोगों में विधिक जागरूकता नहीं होने के कारण होते है, जिन्हे संभवत: रोका जा सकता था। इस आयोजन में 10 राज्यों के लगभग 80 फिल्मकार शामिल थे। जिनमें से 5 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कार प्रदान किया गया। दो दिनों तक चले शॉर्ट फिल्म समारोह में छत्तीसगढ़ के सभी जिला न्यायालयों के माननीय न्यायाधीशों के अलावा उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रमुख रूप से उपस्थित थे। सभी महानुभवों ने एक ही बात पर जोर दिये कि लोगों को कानून की जानकारियां नहीं है, विधिक जागरूकता से ही बड़ते अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। 
* जांजगीर जिले के मुलमुला थाना में नरियरा गांव के दलित युवक सतीश कुमार ने पुलिस के बेरहम पिटाई से दम तोड़ दिया। कानून के रखवालों ले पुलिस हिरासत में उन्हे इतना मारा की बेचारा अस्पताल तक भी नहीं पहुंच पाया रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अब तक प्रशासनिक कार्यवाही के नाम पर चंद पुलिसकर्मियों को ही निलंबित किया गया है। जबकि सतीश कुमार के शरीर के चोटों के निशान चिख चिखकर ये बयां कर रहा है कि उन्हे किस हद तक मारा गया है। मुलमुला थाने के इस खौफनाक घटना ने लोगों के दिलों में खाकी के प्रति नफरत पैदा कर दी, कानून पर से भरोसा उठने लगा है अब दलित और पिछड़ों का। विद्युत विभाग के छोटे से शिकायत पर इस तरह से दर्दनाक पुलिसिया कार्रवाई भला किस कानून की किताब में लिखा गया है यह समझ से परे है। 
एक तरफ माननीय न्यायालय लोगों में कानूनी जागरूकता लाने के लिये प्रयासरत है तो दूसरी तरफ कुछ पुलिसकर्मी खुलेआम कानूनी ताकतों का दुरूपयोग कर रहे है। शासन का तानाशाही रवैया और प्रशासन का बेलगाम नौकरशाह कमजोर, मजलूमों, दलित और पिछड़ों पर कहर बनके टूट रहे है। पुलिस हिरासत में मौत की यह पहली घटना नहीं है इससे पहले भी कई थानों में इस तरह की घटनाएं हो चुकी है। और तमाम मरने वाले गरीब तपके के छोटे गुनहगार ही होते है उनमें से एक भी ऐसा शख्स नहीं जो खुंखार आतंकी रहे हो।  थानों में ही दम निकलते तक पिटाई करने से अपराध जड़ से खत्म होते तो शायद न्यायपालिका की जरूरत ही नहीं होती। 
घटना के चार दिन बाद बड़ते जनाक्रोश और राजनैतिक दबाव के चलते सरकार ले चार पुलिसकर्मियों के उपर हत्या का मामला दर्ज कर लिया और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा करते हुये कहा गया है कि उन्हे 5 लाख रूपये की सहायता राशी भी दी जायेगी। दरियादिल प्रशासन अब उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान भी रहा है। घोषणाओं की इतनी बौछारे घटना के तुरंत बाद होती तो सरकारी तंत्र को लोग शबाशी देते न कि यह कहते कि अपनी कमजोरी छिपाने के पैतरे है। चूकि इस घटना में जागरूक जनता ने दबाय बनाये, विपक्ष ने भी अपनी भूमिका निभाई तब जाकर सतीश के परिवार को न्याय मिल पाया। अब देखना है अंत क्या होगा, क्या सरकार अपना वादा निभायेगी या फिर मामला ठंडा पड़ते ही सब भूल जायेगी। 
- जयंत साहू, रायपुर
-9826753304
jayantsahu9@gmail.com
   

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