25.12.14

पंचायत आम निर्वाचन के समय अनुसूची जारी

छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर द्वारा जिले में पंचायत आम निर्वाचन के समय अनुसूची जारी कर दी गई है। जिले में त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2014-15 का कार्य संपन्न होगा। समय अनुसूची अनुसार प्रथम चरण में तहत निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन तथा नाम निर्देशन प्राप्त करना, स्थानों (सीटों) के आरक्षण के संबंध में सूचना का प्रकाशन एवं मतदान केन्द्रों की सूची का प्रकाशन 31 दिसंबर 2014 को प्रातः 10.30 बजे, नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करना रिटर्निग आफिसर द्वारा 7 जनवरी को अपरान्ह 3 बजे तक, नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 8 जनवरी 2015 को प्रातः 10.30 बजे से, अभ्यर्थिता से नाम वापस लेने की आखरी तारीख 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे तक, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार करना और निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे के बाद, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे प्रतीक आबंटन के बाद, मतदान की तारीख 24 जनवरी को प्रातः 7 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक, मतदान केन्द्र पर की जाने वाली मतगणना के लिये 24 जनवरी को मतदान के पश्चात् खंड मुख्यालय पर की जाने वाली मतगणना के लिये(यदि आवश्यक हो) 27 जनवरी को प्रातः 9 बजे से, सारणीकरण एवं निर्वाचन परिणाम की घोषणा पंच, सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य के मामले में खंड स्तर पर 28 जनवरी को प्रातः 9 बजे से एवं जिला पंचायत सदस्य के मामले(जिला मुख्यालय में) 29 जनवरी को प्रातः 10.30 बजे से किया जायेगा।
    द्वितीय चरण में तहत निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन तथा नाम निर्देशन प्राप्त करना, स्थानों(सीटों)के आरक्षण के संबंध में सूचना का प्रकाशन एवं मतदान केन्द्रों की सूची का प्रकाशन 31 दिसंबर 2014 को प्रातः 10.30 बजे, नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करना रिटर्निग आफिसर द्वारा 7 जनवरी को अपरान्ह 3 बजे तक, नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 8 जनवरी को प्रातः 10.30 बजे से, अभ्यर्थिता से नाम वापस लेने की आखरी तारीख 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे तक, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार करना और निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे के बाद, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे प्रतीक आबंटन के बाद, मतदान की तारीख 28 जनवरी को प्रातः 7 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक, मतदान केन्द्र पर की जाने वाली मतगणना के लिये 28 जनवरी को मतदान के पश्चात्, खंड मुख्यालय पर की जाने वाली मतगणना के लिये(यदि आवश्यक हो) 30 जनवरी को प्रातः 9 बजे से, सारणीकरण एवं निर्वाचन परिणाम की घोषणा पंच, सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य के मामले में खंड स्तर पर 31 जनवरी को प्रातः 9 बजे से एवं जिला पंचायत सदस्य के मामले(जिला मुख्यालय में) एक फरवरी को प्रातः 10.30 बजे से किया जायेगा।
    तृतीय चरण में तहत निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन तथा नाम निर्देशन प्राप्त करना, स्थानों(सीटों)के आरक्षण के संबंध में सूचना का प्रकाशन एवं मतदान केन्द्रों की सूची का प्रकाशन 31 दिसंबर 2014 को प्रातः 10.30 बजे, नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करना रिटर्निग आफिसर द्वारा 7 जनवरी को अपरान्ह 3 बजे तक, नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 8 जनवरी को प्रातः 10.30 बजे से, अभ्यर्थिता से नाम वापस लेने की आखरी तारीख 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे तक, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार करना और निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे के बाद, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन 10 जनवरी अपरान्ह 3 बजे प्रतीक आबंटन के बाद, मतदान की तारीख एक फरवरी को प्रातः 7 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक, मतदान केन्द्र पर की जाने वाली मतगणना के लिये एक फरवरी को मतदान के पश्चात्, खंड मुख्यालय पर की जाने वाली मतगणना के लिये(यदि आवश्यक हो) 3 फरवरी को प्रातः 9 बजे से, सारणीकरण एवं निर्वाचन परिणाम की घोषणा पंच, सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य के मामले में खंड स्तर पर 4 फरवरी को प्रातः 9 बजे से एवं जिला पंचायत सदस्य के मामले(जिला मुख्यालय में) 5 फरवरी को प्रातः 10.30 बजे से किया जायेगा। 

24.12.14

भारत रत्न अटल

 
माननीय अटल बिहारी वाजपेयी-  (जन्म: 25 दिसंबर, 1924) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। 
आरम्भिक जीवन
उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की रियासत ग्वालियर में अध्यापक थे। वहीं शिन्दे की छावनी में 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त में उनकी सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी की कोख से अटल जी का जन्म हुआ था। पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में अध्यापन कार्य तो करते ही थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे। पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुए। महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति "विजय पताका" पढकर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गयी। अटल जी की बी0ए0 की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डी0ए0वी0 कालेज से राजनीति शास्त्र में एम0ए0 की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एल0एल0बी0 की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे।
अटल  ज़ी  का राजनीतिक जीवन
वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और सन् 1968 से 1973 तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। 1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 19 अप्रैल 1998 को पुन: प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए। सन् 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भाजपा0 के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भाजपा विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते हैं।
कवि के रूप में अटल
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे। वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी। इसमें शृंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर "एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक" की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया। वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता। राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था। 
उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं :
  •     मृत्यु या हत्या
  •     अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)
  •     कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
  •     संसद में तीन दशक
  •     अमर आग है
  •     कुछ लेख: कुछ भाषण
  •     सेक्युलर वाद
  •     राजनीति की रपटीली राहें
  •     बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।

21.12.14

बाल यौन अपराध संरक्षण (पोस्को) अधिनियम

यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण(पोक्सो) अधिनियम, 2012 अठारह साल से कम आयु के व्यक्तियों, जिनको बालक के रूप में समझा जाता है, के विरूद्ध यौन अपराधों से निपटता है। इस अधिनियम में पहली बार ‘यौन प्रहार’ एवं ‘यौन हमला’ को परिभाषित किया है। यदि किसी पुलिस अधिकारी, लोक सेवक, रिमांड गृह, संरक्षण या प्रेक्षण गृह, जेल, अस्पताल या शैक्षिक संस्था में स्टाफ के किसी सदस्य द्वारा या सशस्त्र अथवा सुरक्षा बलों के किसी सदस्य द्वारा यह अपराध किया जाता है तो उसे और गंभीर माना जाता है।
इसके तहत बनाई गई नियमावली के साथ ही यह अधिनियम 14 नंवबर, 2012 को लागू हुआ है। यह अधिनियम यौन हमला, यौन उत्पीड़न एवं अश्लील साहित्य के अपराधों से बच्चों की रक्षा का प्रावधान करने के लिए एक व्यापक कानून है, जबकि लोक अभियोजकों तथा नामोंद्दिष्ट विशेष न्यायालयों की नियुक्ति के माध्यम से अपराधों की रिपोर्टिंग, साक्ष्य की रिकार्डिंग, अन्वेषण एवं त्वरित सनुवाई के लिए बालोनुकूल तंत्रों को शामिल करके हर चरण पर न्यायिक प्रक्रिया में बच्चों के हितों की रक्षा की गई है। अधिनियम में अपराधों की रिपोर्टिंग, रिकार्डिंग, अन्वेषण एवं सुनवाई के लिए बालोनुकूल प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं। अधिनियम में ऐसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है जिन्हें अपराध की गंभीरता के अनुसार श्रेणीबद्द किया गया है।
पोक्सो अधिनियम की धारा 39 के तहत राज्य सरकारों से बच्चों की मदद के लिए सुनवाई पूर्व एवं सुनवाई चरण के साथ संबद्ध करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों, पेशेवरों एवं विशेषज्ञों या व्यक्तियों के प्रयोग के लिए दिशानिर्देश तैयार करने की अपेक्षा है। अनेक राज्य सरकारों के अनुरोध पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मॉ़डल दिशानिर्देश तैयार किए गए तथा सितंबर, 2013 में सभी राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को भेजे गए जिन्हें उक्त अधिनियम के बेहतर कार्यान्वयन के लिए उके द्वारा अपनाया या अनुकूलित किया जा सकता है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

30.4.14

अति के अंत कब?

छत्तीसगढ़ के मनखे मन बढ़ सिधवा होथे, भोला-भाला, मेहनत करइया होथे अइसन गोठ ह अब झूठ-लबारी लागथे। खास करके बस्तर बर तो अऊ अपने निंदा लागथे। जेन प्रकृति के कोरा म हाबे तेने मन निरीह होगे हाबे तव दूसर के का मानी पिबे। जब ले छत्तीसगढ़ म चुनई के घमासान माते हे तब ले नक्सली मन के उपद्रोह ह नंगत बाढ़गे हाबे। माओवादी मन किथे हम कोनो निर्दोष के हतिया नइ करन, अपन हक बर लड़त हाबन। का हक खातिर लड़त हव? काकर हक खातिर लड़त हव? का ये लड़ई के रसदा बने हाबे इहू कोति वोमन ल सोचना चाही। काबर की अब इकर घेखरई म कतको निर्दोष के मउत होगे हाबे। अभीच-अभी येमन ह अऊ नंगत तपत हाबे। 11 मार्च के झीरमघाटी म 15 झिन ल मार के ढलगा डरिस। अभी 12 अप्रेल के अऊ 14 झन ल मार डरिस। बस्तर लोकसभा के चुनई बुता म लगे जवान अउ चुनई करमचारी मन ल ओकर गाड़ी सुद्धा बारूद ले उड़ा दिस। येमन 10 अप्रेल के चुनई ल बने रकम ले निपटा के केंप म रूके रिहिन, बाद म उहां ले मतपेटी ल जगदलपुर लेगत-लेगत नक्सली हमला म मारे गिस। आगू दिन अइसने हमला दरभा घाटी म होइसे। 6 झिन सीआरपीएफ के जवान मन तबीयत बने नइ हाबे किके संजीवनी 108 म चड़गे। ओ कोति नक्सली मन ताक म रिहिन अउ एंबुलेंस ल उड़ा दिस। बपरा मन संजीवनी म बइठे मउत के दुवारी चल दिस। ये गाड़ी म जवान मन के संगे-संग संजीवनी 108 के करमचारी मन तको अपन परान गवां दिस। का दोस रिहिस मरईया मन के, का बिगाड़ करत रिहिस। नक्सली मन के का बुता बनथे मार-काट मचाये ले उहीच मन जानही। निर्दइ नक्सली निदई शासन-प्रशासन। नक्सली मन तो अब अपने बात म अडिग नइ राहत हाबे। न कोनो सिद्धांत बांचे हे न कोनो नेक विचारधारा हे। शासन-प्रशासन ये पाय के निर्दइ हे कि ओमन जानसून के नक्सली माड़ा म छोटे करमचारी मन ल पठोथे। अतेक बाटूर सेना अउ पुलिस के राहत ले आठ दस, आठ दस ल पठो-पठो के मरवावत हाबे। जतेक हमर देश म सेना अउ पुलिस हे सबो जाही ते नक्सली मन एकेच मुठा होही। मुठा भर नक्सली मन अपनेच माड़ा म आए जवान मन उपर हमला करथे। माओवादी मन हित अउ हक बर लड़थे तव जंगले म काबर खुसरे हे। हितवा मन के नियत अब दिखत हाबे। कभु एंबुलेंस कभु सवारी बस त कभु गांव बसुंदरा के रहइया मन ल मार देथे। हितवा बनथव तव जेकर सो बैर हे तेकर सो आके लड़व तब जानबोन। शासन-प्रशासन तो मिठ लबरा हाबेच कतको हमला होगे तभो ले अपने म मगन हाबे। तातेतात म रो लेथे, मुआवजा के घोसना कर देथे। चिता के आगी जुड़ाय के बात फेर जस के तस। जांच के आदेश होथे फेर का जांच होइस पता नहीं। राजधानी म बइठे थूके-थूक म बरा चूरोवत बिकास के सपना जनता ल देखावत रिथे। निर्दइ हतियारा मन के संगे-संग शासन ल अब उहां के आदिवासी मन के दशा-दिशा सुधारे के काम करवाना चाही। आदिवासी भाई-बहिनी मन के अस्तित्व अउ अस्मिता खातिर बने साव चेत करके कुछ कदम उठावे ताकी नक्सली मन ओकर भरोसी अउ हितवा-मितवा झन बन सकय। जवान मन ल बला-बला के जुझवाए भर ले बात नी बने अऊ दूसर रसदा कोति तको धियान करे बर परही। नक्सली मन जवान मन ल सिरवाही, जवान मन नक्सली मन ल सिरवाही। येकर नतीजा इही निकलही कि मानवता के नाव मेटा जही।

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